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केवल योद्धा ही नहीं महान कवि भी थे गुरु गोविंद सिंह

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो First Published:23-09-2016 06:25:00 PMLast Updated:23-09-2016 10:55:14 PM
केवल योद्धा ही नहीं महान कवि भी थे गुरु गोविंद सिंह

सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह न केवल योद्धा थे, बल्कि एक महान कवि भी थे। उनकी रचनाएं ओजपूर्ण तो थीं ही, समरसता और साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल भी थीं। उन्होंने उस समय वीर रस से ओतप्रोत रचनाएं की, जिस समय तमाम कवि अपने पालनहार राजाओं के गुणगान में व्यस्त थे।

ये बातें शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय सिख समागम के दूसरे दिन दूसरे सत्र में ‘श्री गुरु गोविंद सिंह जी- ए पोएट पार एक्सीलेंस विषय पर आयोजित खुली चर्चा में देशभर से आए बुद्धिजीवियों ने व्यक्त किए। इस सत्र की अध्यक्षता मगध विवि के सेवानिवृत्त कार्यकारी वाइस चांसलर डॉ. बलबीर सिंह भसीन ने किया। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब मानवता का ग्रंथ है। यह यूनिवर्सल है।

इससे पूर्व पंजाबी यूनिवर्सिटी देहरादून के डॉयरेक्टर हरभजन सिंह ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह की तलवार की तरह उनकी कलम भी धनी थी। उन्हें सबसे पहले नारी उत्थान और सशक्तीकरण की बात की। महिलाओं को आगे बढ़ाना उनका लक्ष्य था। अपनी वाणी से उन्होंने दिलों को जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार के विश्वविद्यालयों में दसवें गुरु की वाणी पर परिचर्चा और शोध हो। पंजाबी यूनिवर्सिटी, दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. मनजीत सिंह ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह की रचनाओं में छंदों की विविधता थी। उनकी रचनाओं को छंदों का अजायब घर भी कहा जाता है। आस्ट्रेलिया से आए गुरजीत सिंह बेंस, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के डॉ. सुखदाल सिंह, जायसवाल अविनाश व सरबजीत सिंह जत्थेदार ने भी विचार रखे।

प्रो. लालमोहर उपाध्याय, एसजीजीएस कॉलेज

गुरु गोविंद सिंह न केवल गुरुमुखी बल्कि हिन्दी, उर्दू और फारसी के भी अच्छे ज्ञाता थे। उनके दसम ग्रंथ में 16 रचनाएं हैं। इनमें 14 रचनाएं हिन्दी, उर्दू और फारसी में हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह खाने का लंगर चलाते हैं उसी तरह गुरुवाणी का भी लंगर होना चाहिए।

प्रो. डॉ. हरमिंदर सिंह बेदी, गुरुनानक देव विवि अमृतसर

गुरु गोविंद सिंह हिन्दी साहित्य में भी ऊंचा स्थान रखते थे। उन्होंने अपनी रचानाओं में ब्रजभाषा के शब्दों का भी बड़ी खूबसूरती से इस्तेमाल किया है। उनके दरबार में 52 कवि थे। उन्होंने उपनिषदों का 50 बार, गीता का नौ बार हिन्दी में अनुवाद कराया था। उनके शास्त्र पुराण में 101 शस्त्रों का विस्तृत वर्णन है।

आचार्य किशोर कुणाल, पूर्व आईपीएस

गुरु गोविंद सिंह की कविताएं आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं। वे हिन्दी साहित्य के साम्प्रदायिक सद्भाव के बड़े कवि थे। उनके जैसा भक्ति और वीर रस का कवि नहीं हुआ।

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