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नव नालंदा महाविहार की स्थापना का उद्देश्य हुआ साकार : दलाई लामा

नव नालंदा महाविहार की स्थापना का उद्देश्य हुआ साकार : दलाई लामा

भारत भूमि की समृद्ध सांस्कृतिक और दार्शनिक परम्परा का मैं ऋणी हूं। मेरा पूरा जीवन नालन्दा की ज्ञान परम्परा को समझने और जानने में व्यतीत हुआ है। भारत में ज्ञान और विज्ञान की जो परम्परा नालन्दा में विससित हुई थी उसे नालन्दा ने तिब्बत को दानकर दिया। नव नालन्दा महाविहार के लिए आवश्यक है कि वह नालन्दा की परम्परा को विकसित करे। ये बातें शनिवार को नव नालंदा महाविहार में छात्रों को संबोधित करते हुए धर्मगुरु दलाई लामा ने कही।

उन्होंने कहा कि नालन्दा मे दिग्गनाग, धर्मकीर्ति, नागार्जुन सांतरक्षित और बुद्ध पालित जैसे सैकड़ों विद्वान हुए। उन्हें पढ़ने, समझने और जीवन में उतारने की जरूरत है। महाविहार के सामने विशाल परम्परा है। उसे आगे बढ़ाने के लिये दूरदर्शिता और कठोर परिश्रम की आवश्यकता है।

नालन्दा के समृद्ध दर्शन और तर्कशास्त्र की परम्परा की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए दलाई लामा ने कहा कि केवल पुस्तक नहीं बल्कि उसे तुलनात्मक और आलोचनात्मक तरीके से समझकर आचरण करने की आवश्यकता है। इस महाविहार को प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा पर काम करना चाहिए। विज्ञान और बौद्ध धर्म की समानता पर बल देते हुए कहा कि क्वान्टम फिजिक्स के साथ इसका मेल कोई आश्चर्य नहीं है। बौद्ध धर्म तो विज्ञान है हीं इसमें भावनाओं और मस्तिष्क की शुद्धि का प्रयास किया जाता है ताकि व्यक्ति सत्य को समझ सके। बुद्धिस्ट साईंस का विभाग खुल जाने से महाविहार में नालन्दा परम्परा के अनुसार तार्किक और बौद्धिक विधि से बौद्ध विषय का अध्ययन शुरू हो जायेगा। यह एशिया महादेश के विश्वविद्यालयों में पहला विभाग खुल रहा है जिसमें बौद्ध मनोविज्ञान, तर्कविज्ञान और अन्त: विज्ञान को भी सम्मिलित किया गया है।

इस अवसर पर परमपावन दलाई लामा ने महाविहार के कुलपति एम.एल.श्रीवास्तव के माध्यम से थंका पेंटिग दिया जिसमें उन्होंने अपना संदेश भी लिखा। उन्होंने वीसी को बुद्ध की मूर्ति प्रदान किया। इस अवसर पर महाविहार ने भी उन्हें एक श्लोक दिया जिसमें प्राचीन नालन्दा विश्वविद्यालय का प्राचीन शील मुद्रित है। उन्होंने कहा कि 58 वर्ष पहले मैंने जो स्वप्न देखा था, वह सार्थक हो रहा है।

नव नालंदा महाविहार आने पर कुलपति मुकुंद लाल श्रीवास्तव के साथ महाविहार परिवार ने धर्मगुरु दलाई लामा का भव्य स्वागत किया। सबसे पहले उन्होंने महाबोधि वृक्ष के पौधे को रोपा। उसके बाद आचार्य नागार्जुन संकाय भवन का उद्घाटन किया। इसके बाद महाविहार के छात्रों को अपने आने का उद्देश्य बताते हुए कहा कि बुद्धिस्ट साईंस फैकल्टी के यहां खुल जाने से यहां के छात्रो को बौद्ध धर्म के बारे में जानने का ज्यादा फायदा होगा।

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  • Web Title:Aims of Nav Nalanda Mahavihar fulfilled : Dalai Lama