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नक्सलियों के गढ़ में अपने कानूनी हक से रूबरू हुए आदिवासी समुदाय

लखीसराय। निज प्रतिनिधि First Published:01-12-2016 09:39:43 PMLast Updated:01-12-2016 09:48:22 PM

गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार के द्वारा नक्सलियों के खोह में कानून की पाठशाला लगाई गई। कानून की इस पाठशाला में जंगली एवं पहाड़ी इलाकों में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोगों को कानून की जानकारी दी गई। उन्हें उनके हक और अधिकार के बारे में बताया गया। उन्हें बताया गया कि वे लोग बिना किसी के भय और दबाव से निडर होकर संपर्क कर सकते हैं। न्यायालय के द्वारा हर संभव सहायता उपब्ध कराया जाएगा।

जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड के सिमरातरी कोडासी में जिला विधिक सेवा प्राधिकार लखीसराय के तत्वावधान में आदिवासियों के अधिकारों का संरक्षण और प्रवर्तन के लिए विधिक सेवाएं विषय पर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

डालसा के सचिव सह एडीजे वन त्रिभुवननाथ आदिवासियों को संबोधित करते हुए करते हुए कहा कि जनजातियों के सामाजिक आर्थिक उत्थान तथा उनके विधिक अधिकारो की रक्षा के लिए नालसा कानून बना कर विकास की मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया है।

हालात से करवाया रूबरू

आदिवासी महिला एवं पुरुष ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम श्री त्रिभुवन नाथ से रुबरु होते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार के द्वारा चलाई जाने वाले गरीबी उन्मूलन में 'जनकल्याणकारी योजनाओं का सच बताते हुए कहा कि आज भी साफ पानी' इंदिरा आवास 'स्वास्थ्य सुविधाएं' रोजगार हेतु बैंक से किसी प्रकार की सुविधाएं मयस्सर नही हुआ है और न ही पंचायतों द्वारा ही काम मिलता है। पता का दौना तथा जंगल से लकड़िया चुन-चुन कर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन 'खाद्य सुरक्षा योजना के तहत अनाज का लाभ भी नहीं मिलता है। पुलिस झूठे मुकदमा में फंसा कर प्रताड़ित किया करते हैं, तो दूसरी ओर स्थानीय ठेकेदार भी प्रशासनिक साठगांठ से विकास योजनाओं को हड़प कर जाते हैं। डालसा सचिव त्रिभुवन नाथ ने आदिवासियो को आश्वस्त करते हुए कहा कि जनजातियों के अधिकारों की रक्षा के लिये नालसा ने कानून बनाया है जिसके तहत स्थानीय पीलभी आप के बीच नियुक्त किया गया है जो पैनल अधिवक्ता के माध्यम से आप तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की गारंटी करेंगे।

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Web Title: tribal communities interact their legal rights in naxalite strongholds
 
 
 
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