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विदेशी पक्षियों के लिए बनाए जाएंगे घोसले

जैव विविधता संरक्षण एवं परिस्थितकी संतुलन बनाए रखने के लिए और ठंड के रोमांचकारी मौसम में विदेशी पक्षियों को आवाज की सुविधा देने के लिए अंतर राष्ट्रीय पक्षी मेले की सफलता के लिए वन विभाग और विपनेट, राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस ने संयुक्त रूप से कमर कस ली है।

जिला विज्ञान कांग्रेस के समन्वयक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि वह वल्र्ड वाचिंग रिकार्ड कराने की मुहिम छेड़ चुके हैं इसके लिए छात्र-छात्राओं को जागरुक किया जा रहा है। 77.50 हेक्टेयर में फैला सेमरई वेटलैंड मुख्य रूप से पक्षी बिहार है। विदेशी पक्षी कम तापमान पर भी यहां आते हैं और अपना बसेरा बनाते हैं। उनका कहना है कि 6 हजार से 8 हजार किलो मीटर की दूरी तय करने के बाद यह विदेशी पक्षी सेमरई, नगरिया वेटलैंड में आवास बनाकर नई संतति पैदा करते हैं। गर्मी शुरू होते ही यह अपने वतन लौट जाते हैं। प्रवासी पक्षियों में ग्रेल, जगूज, शवेलर, मेलार्ड, रेडक्रेसन्ट, पंचर्ड, वाइजियल, स्थानीय पक्षियो में ब्लैक नैवंड, स्टार्ड, ब्लैक आइसिस, किंगफिशर, पाइड किंगफिशर से सैलानियों का मनोरंजन होता है। अक्सर देखा गया है कि मछलियां आदि मारने को कीटनाशकों के प्रयोग को भांप यह पक्षी तालाबों में नहीं उतरते जो गंभीर चिंता का विषय है।

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  • Web Title:will make nest for international birds
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