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तीन तलाक पर मुस्लिम महिलाओं ने पर्सनल लॉ का किया समर्थन

- मदरसा तालिमुल इस्लाम में महिलाओं ने दिया शरीयत का हवाला - मुस्लिम लड़कियां बोली कानून कितने बन जाएं, हम शरई पर चलेंगे - तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाएं-लड़कियां जनमत को भी तैयार फोटो समाचार--दीप तिवारीबरेली। कार्यालय संवाददातातीन तलाक और कॉमन सिविल कोड को लेकर केंद्र सरकार की पहल पर उलेमा के बाद अब मुस्लिम महिलाएं, लड़कियों ने विरोध के तेवर दिखाए हैं। मुस्लिम संगठनों से जुड़ी महिलाओं ने कहा कि सरकार दो-चार महिलाओं के बहकावते में आकर अपना फैसला दे रही है। अगर ऐसा है तो हम जनमत के लिए भी तैयार है।बिहारीपुर कलां स्थित मदरसा तालिमुल इस्लाम की फातिमा आलिया, गुलबख्श, राबिया, हुमैरा, आसिया ने कहा कि ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं कुरान और हदीस में कही गई बातों पर ही अमल करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस्लाम में पुरुषों को तलाक का हक दिया गया है तो महिलाओं को भी ‘खुला का अधिकार दिया गया है। चेतावनी दी कि अगर शरीयत के बनाए नियमों और मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखलअंदाजी की गई तो मुस्लिम महिलाएं आंदोलन छेड़ने से भी पीछे नहीं हटेंगी। शहनाज, फात्मा, रूकसाना, आयशा फात्मा नूरी, नाजरीन, गुलजार फात्मा, शबनम, शाजिया, फिरदौस आदि ने कहा कि सरकार को मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल नहीं देना चाहिए। केंद्र में बैठी भाजपा की सरकार सिर्फ वोट के लिए इस तरह के मामले उठाकर जनता को गुमराह करने में लगी है। हम लोग दीनी और दुनियावी तालीम ले रहे हैं, इसका मतलब ये नहीं कि नया कानून बनाकर शरई कानून को नजरअंदाज कर दिया है। सरकार जो चाहे कर ले मुसलमान शरीयत कानून पर ही अमल करेंगे। ----------------तलाक मसले का हल शरीयत में दो चार महिलाओं ने तलाक पर आपत्ति दर्ज कर दी तो उसको सरकार गंभीरत से ले रही है। अगर महिलाओं की राय ही जाननी है तो सरकार जनमत कराए। तलाक, शादी और दीनी मसलों को आलिमे दीन ही बैठकर सुलझा सकते हैं, नये कानून से मामले और बिगड़ेंगे। - निलोफर मलिक, अध्यक्ष महिला विकास समिति-------------तलाक पर सरकार नहीं शरई कानून चलेगा औरतों को इस्लामिक कानून को समझना होगा। दीनी इल्म की जानकारी बेहद जरूरी है। तलाक मसला सरकार नहीं शरीयत तय करेगी। मदरसे की तमाम लड़कियां कॉमन सिविल कोड का विरोध कर रही हैं। - हाफिज इमरान रजा बरकाती, प्रबंधक, मदरसा तालिमुल इस्लाम गरीब नवाब ---------------------------तलाक के मुद्दे पर भरवाए जाएंगे फार्म मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के देशव्यापी अभियान से बरेली भी जुड़ने जा रहा है। जिले में भी कॉमन सिविल कोड और तीन तलाक के मुद्दे पर फार्म भरवाने का सिलसिला जल्द शुरू होगा। मुस्लिम सामाजिक संगठनों ने कैंप लगाकर फार्म भरवाने की तैयारी कर ली है। बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खां वारसी ने बताया कि जनसेवा, जमीतुल कुरैश, आम औरत सेवा समिति, वुमन वॉयस, युवा सेवा क्लब जैसे तमाम संगठनों को साथ लेकर शहर, गांव में कैंप लगाकर मुस्लिम लड़कियों और औरतों से फार्म पर हस्ताक्षर कराए जाएंगे। ये फार्म मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से जारी किए गए हैं।

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  • Web Title:bareilly muslim woman against of common civil code