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शाहजहांपुर में जलसे में हाथ उठाकर दहेज न लेने का किया वादा

मोहल्ला महमंद जंगला स्थित मदरसा दारुस्सवालिहीन में जलसा सीरतुन्नबी का आयोजन किया गया, जिसमें मुआशरे को नेक अमल करने की प्रेरणा दी गई। आखिर में मुल्क व कौम की तरक्की और कामयाबी के लिए दुआ मांगी।

दारुल उलूम देवबंद के मुबल्लिग-ए-इस्लाम व मुख्य वक्ता मौलाना मोहम्मद राशिद ने खिताब करते हुए कहा कि पैगम्बर-ए-इस्लाम ने फरमाया कि शादियां माल अस्बाब देखकर मत करो, बल्कि दीनदारी को देखो। उन्होंने कहा कि दहेज एक लानत है और इसे मांगो नहीं, क्योंकि इसमें खैर नहीं है। मौलाना राशिद ने कहा कि ईमानवालों की जिम्मेदारी है कि पैगम्बर-ए-इस्लाम की सुन्नतों को जिंदा रखें। हमें एक अल्लाह का मानने वाला बनना होगा और उसे राजी करने के लिए नमाजें पढ़ना होंगी। उन्होंने कहा कि तीन तलाक पर पाबंदी के जरिए हमारे मजहब पर निशाना साधा जा रहा है, जो सरासर गलत है। मौलाना राशिद ने जलसे में मौजूद लोगों से हाथ उठवाकर दहेज न लेने का वादा करवाया। प्रोफेसर सैयद नोमान, मौलाना अजीमुददीन कासमी, मुफती हुसैन ने भी ख्यालात का इजहार किया। इससे पहले जलसे का आगाज कारी आसिम ने तिलावते कुरआन-ए-पाक से किया। कारी मोहम्मद जुल्फिकार ने बारगाह-ए-रिसालत में नात का नजराना पेश किया। इस मौके पर मौलाना इमरान कासमी, प्रोफेसर सैयद मुर्शिद, सैयद इरशाद हसन, हाजी अबरार, शकीलुर्रहमान, हाजी मानूस, फजल, डॉ उमर सहित बड़ी तादाद में लोग मौजूद रहे।

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  • Web Title:Prom In The Hands And Promise Not To Take Dowry