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युवती ने खुद खोया कौमार्यः सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने एक लड़की के साथ बलात्कार के मामले में दोषी ठहराये जा चुके शख्स को बरी कर दिया और कहा कि पीड़िता ने खुद कौमार्य भंग कराया और उसके नाबालिग होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। शीर्ष न्यायालय ने सुनील को बरी करते हुए कहा कि खुद पीड़िता के पिता बिशन उसकी उम्र नहीं बता सके और अभियोजन पक्ष भी डॉ साधना वर्मा द्वारा सुझाये गये ऑसिफिकेशन तथा रेडियोलॉजी परीक्षण कराने में नाकाम रहा।

उच्चतम न्यायालय ने फैसले में कहा, दर्ज साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि शिकायती (सुनील) अभियोजिका की जाति और गोत्र से ही संबंध रखता है और अकसर उसके घर जाता था। उनके बीच प्यार का मामला था और (उच्च) न्यायालय ने भी कहा कि उसने कभी अपीलकर्ता सुनील द्वारा कौमार्य भंग किये जाने पर विरोध नहीं जताया।

न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति ए़क़े पटनायक की पीठ ने चंडीगढ़ की एक सत्र अदालत द्वारा सुनील को दोषी ठहराये जाने के फैसले को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया। सुनील ने उच्चतम न्यायालय में गुहार लगाते हुए अभियोजन पक्ष के बयान में अनेक विसंगतियों का जिक्र किया था। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि आपराधिक मामलों में किसी व्यक्ति को अटकलबाजी पर दोषी ठहराना अनुचित होगा।

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  • Web Title:युवती ने खुद खोया कौमार्यः सुप्रीम कोर्ट