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सहकारी क्षेत्र के चुनाव की तारीखें फिर बदलीं

सहकारी क्षेत्र में हो रहे चुनाव में पूर्व निर्धारित चुनाव की तारीखें बदल गई हैं। पहले सभी स्तर के चुनाव दिसम्बर में खत्म हो जाने थे, लेकिन अब जिला सहकारी बैंकों के ही चुनाव जनवरी 2010 के आखिरी हफ्ते में हो पाएँगे।

उसके बाद पीसीएफ और अन्य सहकारी संस्थाओं के चुनावों की तारीखें नए सिरे से जारी की जाएँगी। लिहाजा सहकारिता की पूरी चुनावी प्रक्रिया छह महीने बाद ही पूरे होने की संभावना है।

प्रमुख सचिव सहकारिता अमल कुमार वर्मा कहते हैं कि कई स्थानों पर चुनाव अदालती कार्यवाही के चलते स्थगित करने पड़े हैं। अदालत से मामला निपटते ही सभी चुनावों की तारीखें घोषित कर दी जाएँगी। डेढ़ दजर्न जिला सहकारी बैंकों के चुनाव जनवरी के अंतिम सप्ताह में होंगे।

प्रदेश सरकार ने यूपी श्रम एवं निर्माण सहकारी संघ और उत्तर प्रदेश सहकारी उपभोक्ता संघ के चुनावों को भी स्थगित कर दिया था। ये चुनाव 26 और 29 अक्टूबर को प्रस्तावित  थे। पीसीएफ और अन्य राज्य स्तरीय सहकारी संगठनों के चुनाव स्थगित चल रहे हैं। इससे पहले प्राथमिक संगठनों के कन्नौज, मैनपुरी, इटावा, एटा, औरैया, झाँसी और जालौन के चुनाव को स्थगित किया गया था।

जिला स्तरीय सहकारी संगठनों का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव जिला सहकारी बैंक, जिला सहकारी उपभोक्ता संघ का होता है। अभी 16 जिला सहकारी बैंकों के चुनाव होना बाकी हैं। इनके अलावा अभी यूपी कोआपरेटिव फेडरेशन लि., यूपी सहकारी ग्राम विकास बैंक लि., उत्तर प्रदेश आलू विकास एवं विपणन सहकारी संघ लि., यूपी सहकारी विधायन एवं  शीतगृह संघ लि., यूपी कोआपरेटिव बैंक लि. और यूपी कोआपरेटिव यूनियन लि. के चुनाव होने हैं।

यह सभी सहकारिता क्षेत्र की शीर्ष संस्थाएँ हैं। इन संस्थाओं के चुनावों की तारीखें भी अब फरवरी के बाद ही जारी की जाएँगी। अभी तक इन संगठनों में सपा काबिज थी। इस साल सहकारी संगठनों को जितने भी  चुनाव हुए हैं उनमें से ज्यादातर में बसपा का कब्जा हुआ है।

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