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ब्रह्मलीन संत को दी जल समाधि

श्री निरंजनी अखाड़ा के पूर्व सचिव महंत रामकृष्ण गिरि लंबी बीमारी के बाद ग्वालियर में ब्रह्मलीन हो गए। महंत रामकृष्ण गिरि के शरीर त्याग देने से हरिद्वार के संतों में शोक व्याप्त हो गया। ग्वालियर से उनकी पाथिर्व देह को उनके शिष्य महंत डूंगर गिरि हरिद्वार लेकर आए। संत समाज की उपस्थिति में अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें गंगा की नीलधारा में जलसमाधि दी गई।

महंत रामकृष्ण गिरि ग्वालियर में प्रवास कर रहे थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके पाथि शरीर को बुधवार को निरंजनी अखाड़ा लाया गया, जहां अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास, महंत हरिगिरि, महंत प्रेमगिरि, महंत विद्यानंद सरस्वती, महंत मित्रप्रकाश, महंत राजेंद्र दास, महंत मोहनदास, स्वामी कैलाशानंद समेत अनेक संतों ने उनकी देह पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। महंत त्रयंबक भारती ने कहा कि महंत रामकृष्ण गिरि के ब्रह्मलीन होने से अखाड़े को अपूरणीय क्षति हुई है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। महंत ज्ञानदास, महंत मित्रप्रकाश, महंत हरिगिरि ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महंत रामकृष्ण गिरि मृदुभाषी, सहज और सरल स्वभाव के संत थे। उन्होंने सदैव अखाड़े को समृद्ध किया।

उन्होंने हरिद्वार में श्रवणनाथ मठ, डिग्री कालेज और अन्य संस्थाओं को गति प्रदान की। उप कुंभ मेलाधिकारी हरवीर सिंह ने भी ब्रह्मलीन महंत को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान स्वामी सहजप्रकाश, सतपाल ब्रह्मचारी, महंत शिवशंकर गिरि, स्वामी सोमेश्वरानंद, महंत महेंद्र सिंह, महंत बलवंत सिंह, महंत गंगादास उदासीन, महंत भगवानदास, महंत रघुवीर दास समेत अनेक संत उपस्थित थे।

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