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हाथों में अब कुदाली नहीं कलम होगी

अब बाल मजदूरों के हाथों में कुदाली या फावड़े की बजाय कलम और पीठ पर बोरे की बजाय बस्ता टंगा होगा। आखिर श्रम विभाग ने ऐसे बाल श्रमिकों की सुध लेते हुए श्रम मंत्रालय को उनके लिए स्कूल खोलने का एक प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव के अनुसार जिले में बाल श्रमिकों के लिए 22 स्कूल खोले जाएंगे।

जिले के श्रम विभाग ने केंद्रीय श्रम मंत्रालय को बाल श्रमिकों के लिए स्कूल खोलने का प्रस्ताव भेजा है। सदर तहसील में सबसे अधिक छह स्कूल खोले जाएंगे। इसका कारण बताया गया है कि इस तहसील में सबसे अधिक बाल श्रमिक हैं। विभाग के अनुसार जिले के कुल बाल श्रमिकों का चालीस फीसदी बाल मजदूर सदर में रहते हैं।

श्रम विभाग के अनुसार जिले में इस समय चिन्हित किए बाल मजदूरों की संख्या है 2291 में है। इनके लिए अलग से 22 स्कूलों का प्रस्ताव बना कर भेजा गया है। यदि यह प्रस्ताव पास हो जाता है तो हाथों में कुदाली और फावड़ा चलाने वाले बाल मजदूरों के हाथों में होगी कलम और उनकी पीठ पर गंदगी भरा बोरा नहीं बल्कि एक अदद स्कूली बैग होगा।

श्रम विभाग के सहायक आयुक्त अटल कुमार का कहना है कि बाल श्रम उन्मूलन के लिए यह प्रस्ताव भेजा गया है ताकि जिले में बच्चों की दशा सुधर सके। जैसे ही यह प्रस्ताव पास होता है जिले में बाल श्रमिकों की स्थिति के अनुसार स्कूलों का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। स्कूल बनने के बाद संबंधित क्षेत्र से बच्चों को स्कूलों में भर्ती किया जाएगा। 
 

 

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