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पत्रकार एवं साहित्यकार राजेन्द्र अवस्थी का निधन

प्रख्यात पत्रकार और लेखक राजेन्द्र अवस्थी का बुधवार सुबह एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह काफी समय से बीमार थे और आज उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों के काम करना बंद कर देने के कारण उनका निधन हो गया। वह 79 साल के थे। उनके परिवार में तीन बेटे और दो बेटियां हैं। उनका अंतिम संस्कार बुधवार अपराह्न यहां के लोदी रोड स्थित शवदाह गृह में कर दिया गया।

मध्य प्रदेश के गढा जबलपुर में 25 जनवरी, 1930 को जन्मे राजेन्द्र अवस्थी नवभारत, सारिका, नंदन, साप्ताहिक हिन्दुस्तान और कादम्बिनी के संपादक रहे। उन्होंने अनेक उपन्यासों कहानियों एवं कविताओं की रचना की। वह ऑथर गिल्ड आफ इंडिया के अध्यक्ष भी रहे। दिल्ली सरकार की हिन्दी अकादमी ने उन्हें 1997-98 में साहित्यिक कृति से सम्मानित किया था।

उनके उपन्यासों में सूरज किरण की छांव, जंगल के फूल, जाने कितनी आंखें, बीमार शहर, अकेली आवाज और मछलीबाजार शामिल हैं। मकड़ी के जाले, दो जोड़ी आंखें, मेरी प्रिय कहानियां और उतरते ज्वार की सीपियां, एक औरत से इंटरव्यू और दोस्तों की दुनिया उनके कविता संग्रह हैं जबकि उन्होंने जंगल से शहर तक नाम से यात्रा वृतांत भी लिखा है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने राजेन्द्र अवस्थी के निधन पर शोक जताते हुए कहा है कि उनके निधन से आदर्शोन्मुख पत्रकारिता की गहरी क्षति हुई है। आज यहां जारी एक शोक संदेश में उन्होंने कहा कि उनके निधन से पत्रकारिता की ही नहीं साहित्य में क्षेत्र में भी खालीपन आ जाएगा। कला एवं संस्कृति मंत्री डा. किरण वालिया ने कहा कि उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मापदंड स्थापित किए थे।

हिन्दी अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. अशोक चक्रधर कहा कि कादम्बिनी के संपादक के रुप में उन्होंने बिन्दु .बिन्दु विचार से ज्ञान का अथाह समुद्र पैदा किया और पाठकों में अपनी गहरी पहचान बनाई। उनका जाना पत्रकारिता और साहित्य दोनों क्षेत्रों के लिए अपूरणीय क्षति है।

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