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उत्तर प्रदेश: सालभर चलती रही साहित्यक गतिविधियां

उत्तर प्रदेश में साल भर साहित्यक गतिविधियां चलती रहीं और पुस्तक मेले, लखनऊ महोत्सव के आयोजन के साथ-साथ स्थलीय संग्रहालयों के निर्माण का सपना भी पूरा हुआ। हिन्दी साहित्य की सेवा करने वाले साहित्यकारों को इस वर्ष प्रदेश के सबसे बड़े सम्मान भारत भारती तथा अन्य सम्मान मिले। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निर्देशक डॉ. सुधाकर अदीव ने बताया कि संस्थान द्वारा संचालित पुरस्कार योजना के तहत हिन्दी साहित्य की सेवा में लगे प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान भारत भारती डॉ. केदार नाथ सिंह को दिया गया। इस पुरस्कार के तहत एक प्रशस्ति पत्र, 2.51 लाख रुपये, श्रीफल और शॉल दी जाती है। उन्हें यह सम्मान वर्ष 2007 के लिए दिया गया।

डॉ. अदीव ने बताया कि हिन्दी संस्थान ने रवीन्द्र कालिया को लोहिया साहित्य सम्मान, डॉ. बाल शौरी रेड्डी को महात्मा गांधी साहित्य सम्मान, डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को हिन्दी गौरव सम्मान तथा डॉ. जितेन्द्र नाथ पाठक को पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्मान प्रदान किया। इन पुरस्कारों के तहत सभी को प्रशस्ति पत्र और दो दो लाख रुपये की नगद राशि दी गई।

डॉ. अदीब ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बीते वर्ष हिन्दी संस्थान ने कई कार्यक्रम भी आयोजित किए। इस वर्ष संस्थान ने अपनी बेवसाइट भी शुरु की, जिस पर प्रदेश में होने वाली सभी साहित्यक गतिविधियों तथा संस्थान द्वारा आयोजित कराये जाने वाले कार्यक्रमों और संगोष्ठियों की विस्तृत जानकारी दी गई है।

उनके मुताबिक हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए संस्थान अपने बजट के अनुरूप अधिक से अधिक साहित्यक कार्यक्रमों का आयोजन करता है लेकिन अगर संस्थान का बजट बढ़ा दिया जाए तो प्रदेश के सुदूर स्थित जिलों तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों पर भी ऐसे साहित्यक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। ऐसा होने पर कई जनपदीय साहित्यकारों को साहित्य जगत में प्रमुखता से भाग लेने का अवसर मिलेगा।

इसी सिलसिले में सार्क देशों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार की योजना के अन्तर्गत काठमांडु में भारतीय दूतावास के सहयोग से एक कार्यशाला एवं पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन होने की संभावना है। हिन्दी के प्रचार और प्रसार के लिए उप्र हिन्दी संस्थान ने नवाबों की नगरी में 12 से 20 सितंबर तक सातवें राष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन किया। इस मेले ने लखनऊ वासियों को तो आकर्षित किया, साथ ही साहित्य लेखकों से मेले में रूबरू होकर हर आयु वर्ग के पाठकों को खुशी भी मिली।

सातवें राष्ट्रीय पुस्तक मेले के आयोजन को सराहनीय प्रयास बताते हुए उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी ने कहा कि मनुष्य के जीवन में पुस्तकों का बहुत महत्व है और लोगों में अध्ययन की आदत को बढ़ावा देने की दिशा में यह मेला एक सार्थक प्रयास है। मेले में लेखक से मिलिए कार्यक्रम में वरिष्ठ व्यंग्यकार और भाषा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष गोपाल चतुर्वेदी ने कहा था कि अगर शब्द सशक्त है तो वह कभी नही मरता। व्यक्ति भले ही रहे न रहे, लेकिन शब्द अमर हो जाते हैं।

इस पुस्तक मेले में करीब सवा करोड़ रुपये मूल्य से अधिक पुस्तकों की खरीद-फरोख्त की गई। लखनऊ के महापौर डॉ. दिनेश शर्मा ने ऐसे पुस्तक मेलों के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मेला दर्शाता है कि पुस्तकों के प्रति लोगों का रूझान कितना बढ़ा है। नवंबर माह में प्रदेश की राजधानी लखनऊ में संपन्न लखनऊ महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ-साथ अनेक प्रकार की प्रतियोगिताएं भी हुई।

इस बार शानदार लखनऊ महोत्सव पर उस समय धब्बा लग गया जब राजधानी लखनऊ के ही प्रथम नागरिक महापौर डॉ. दिनेश शर्मा को आयोजकों द्वारा आयोजन से चंद घंटे पूर्व निमंत्रण देने से नाराज महापौर ने इसे प्रथम नागरिक का अपमान मानते हुए महोत्सव का बहिष्कार कर दिया।

राज्य में प्राचीन सभ्यता के मिले अवशेषों को एकत्र कर प्रदर्शित करने के लिए पांच स्थलीय संग्रहालयों का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया। ऐतिहासिक, पौराणिक और पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं जहां से मिलीं, उन्हें वहीं प्रदर्शित करने की लोगों की मांग को देखते हुए केन्द्र और प्रदेश सरकार के सांस्कृतिक विभाग ने एक अनूठी पहल की। ऐतिहासिक महत्व के जिलों का चयन कर वहां पाई जाने वाली प्राचीनतम वस्तुओं का प्रदर्शन करने के लिए स्थलीय संग्रहलायों का निर्माण कराया गया।

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में शिवद्वार और मउकला, ललितपुर जिले के सिरीन खुर्द, महोबा और मिर्जापुर जिलों मे निर्मित किये गये इन स्थलीय संग्रहालयों में देश की, प्राचीनतम महत्व की वस्तुओं को संजो कर रखा गया है। इससे क्षेत्रवासियों के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी इन स्थलों का महत्व बढ़ने लगा है।

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज से 40 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम शिवद्वार पौराणिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं भूतात्विक महत्व का होने के कारण पूरे प्रदेश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसीलिए शिवद्वार गांव को पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित करने का निर्णय किया गया है।

उत्तर प्रदेश शासन ने एक संग्रहालय के निर्माण की स्वीकृति दे दी जिसके बाद इसके निर्माण कार्य के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 45 लाख रूपये उपलब्ध कराये गए। निर्माण के बाद इस संग्रहालय का इस साल तीन सितंबर को उत्तर प्रदेश के संस्कृति मंत्री सुभाष पांडेय ने उद्घाटन किया। संग्रहालय में लगभग 150 प्रतिमाएं रखी गई हैं। संग्रहालय में वीणा वादिनी सरस्वती की 9वीं शताब्दी, जैन मुगलिया की 10वीं शताब्दी, ब्रहमा विष्णु महेश की 9वीं शताब्दी, दिग्रपाल कुबेर की 9वीं शताब्दी, नायिकाओं का संयुक्त प्रस्तर खण्ड 10वीं शताब्दी, उमा माहेश्वर की 10वीं शताब्दी, नर्तक गणपति 10वीं शताब्दी तथा गणेश जी की 10वीं शताब्दी की प्रतिमाओं सहित अन्य प्रतिमाएं भी शामिल हैं।

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