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दो टूक (30 दिसंबर, 2009)

सरकार शिक्षकों को 65 साल की उम्र तक पढ़ाने का मौका देना चाहती है। जाहिर है इस खबर में शिक्षकों के लिए खुश होने की गुंजाइश है। उन उच्च संस्थानों को भी इससे फायदा मिलेगा जहां विशेषज्ञ अध्यापकों की बेहद कमी है।

लेकिन यह खबर उन लाखों नौजवान बेरोजगारों को हताश कर सकती है जो झोलाभर डिग्रियां लिए खाक छान रहे हैं। यह एक अबूझ पहेली है कि सरकार एक तरफ देश में शिक्षकों की कमी की बात करती है, दूसरी ओर पर्याप्त डिग्रियों के बावजूद नौजवानों के पास काम नहीं है। अध्यापकी को करियर बनाने का इरादा रखने वाले हजारों छात्र अपने भविष्य को लेकर पहले ही आशंकित रहते हैं। शिक्षकों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने की खबर कम से कम उनके लिए तो किसी झटके से कम नहीं।

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