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ब्लॉग वार्ता : ठाकुर ब्लॉगर सिंह

राजनीति में समादरित और अनादरित होने का सौभाग्य किसी को मिला है तो वो हैं अमर सिंह। समाजवादी पार्टी के नेता। राजनेता होने के साथ साथ वे पॉलिटिकल फिल्म के बेजोड़ कलाकार लगते हैं। शेरो-शायरी से टीवी फुटेज पर कब्जा जमाने वाले अमर सिंह को लालू यादव के बराबर कवरेज मिलता है। वो भी अपने दम पर। पार्टी के दम पर नहीं। क्लिक करते ही ग्लोबल विलेज में अमर सिंह ठाकुर होने की धमक के साथ अपने आगमन का एलान करते हुए मिल जायेंगे। आप माने या न माने लेकिन अमर सिंह की साइट पर लिखा है कि वे प्राइवेट पर्सन हैं। जिस तरह से वामपंथ से लेकर बीजेपी और कांग्रेस में धमाल करते रहते हैं, लगता नहीं कि अमर सिंह प्राइवेट पर्सन हैं।

सिंगापुर के अस्पताल में किडनी के आपरेशन के बाद बिस्तर पर पड़े-पड़े अमर सिंह ने वहीं से प्रेस कांफ्रेंस कर दिया। पत्रकारों को इंटरव्यू देने के लिए बुला लिया। टेक्नोलॉजी का स्टाइल से इस्तेमाल करने वाले अमर सिंह की वेबसाइट अब आई है, हैरानी होती है। दावा किया गया है कि यह अमर सिंह के द्वारा अमर सिंह की वेबसाइट है। लेकिन अमर सिंह कब से गोल्फ खेलने लगे। कहां गोल्फ खेलते हैं। ऐसा कोई निजी और सार्वजनिक क्षण नहीं होगा जिसे मीडिया ने कवर नहीं किया होगा। लेकिन कैमरों की नजर से बचाकर अमर सिंह गोल्फ खेल लेते हैं तो मानना चाहिए कि वे प्राइवेट पर्सन भी होंगे।

अमर सिंह की वेबसाइट पर परिचय की भाषा उन्हें विशिष्ट बनाती है। एक तरह का वही भाव दिखता है जिस भाव के कारण वे मायावती के आजीवन आलोचक हो गए हैं। लिखा है कि अमर सिंह एक उद्योगपति के अलावा पसंद किये जाने वाले राजनेता भी है। कई जानकारियां नईं लगती हैं। मसलन, स्टेट बैंक के निदेशक भी रह चुके हैं। इंडियन एयरलाइन्स के भी निदेशक होने का गौरव हासिल रहा है।

अमर सिंह को विज़नरी बताया गया है और कहा गया है कि मुश्किलों में घिर कर भी आसानी से निकल आना फितरत-ए-अमर है। काफी असरदार तरीके से दावा किया गया है कि अमर सिंह भारतीय होने के साथ-साथ ग्लोबल नागरिक भी हैं। ग्लोबल नागरिक ठाकुर अमर सिंह। अच्छा लगा ये लाईन देख कर। अमर सिंह के बारे में कहा गया है कि वे भावी भारत के निर्माण में जुटे कद्दावर नेता है। दुनिया भर में उनका नाम है। इसके सबूत में दो विदेशी मेहमानों से मुलाकात करते हुए अमर सिंह की तस्वीर भी है।

सार्वजनिक जीवन की कुछ बातें सिर्फ अमर सिंह ही कह सकते हैं। उनकी साइट पर लिखा है कि अमर सिंह वो आवाज हैं जो आपके कानों और ध्यान की मांग करती है। इसी वेबसाइट में अमर सिंह का ब्लॉग भी है। हरियाणा की रुचिका गिरहोत्रा मामले में सवाल करते हैं। लिखते हैं कि प्यारी रुचिका को जीवन अंत करने की नौबत ही क्यों आई? अमर सिंह कहते हैं कि वे भी दो बेटियों के पिता हैं और रुचिका के परिवार के दर्द को महसूस करते हैं।

इस लेख पर चालीस से अधिक प्रतिक्रियाएं आईं हैं। लगता है कि नेट-जगत में भी अमर सिंह का जलवा कायम होने वाला है। शैलेंद्र अपनी प्रतिक्रिया में लिखते हैं कि आपने अच्छा लिखा है लेकिन क्या आप अपनी सियासी रसूख का इस्तमाल कर रुचिका के परिवार की मदद करेंगे। अमर सिंह का भी फैन क्लब बनने जा रहा है।
उत्तरप्रदेश में हुए उपचुनावों में समाजवादी पार्टी को मिली हार पर अमर सिंह का पोस्ट है। कहते हैं वे इस बात से खुश हैं कि उन्हीं की आलोचना हो रही है। इससे वे अपने नेताजी को तमाम लांछनों से बचा लेते हैं।

लिखते हैं कि क्या यह इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी मजबूत नेता को लोगों ने समर्थन नहीं दिया। इंदिरा गांधी को भी हार का सामना करना पड़ा। इस लेख के अंत में अमर सिंह किसी पीठाचार्य की तरह राजनीतिक ज्ञान प्राप्ति की घोषणा करते हैं। कहते हैं कि फीरोजाबाद की हार के बाद मुझे अंदाजा हो गया कि राजनीति फूलों की सेज नहीं है। अमर सिंह की वेबसाइट और ब्लॉग दिलचस्प है। तमाम विवादों के बीच उनकी हैसियत निर्विवाद है। मायावती पब्लिक में एलान कर अमर सिंह को जेल नहीं भेज पाईं।

सोनिया गांधी के घर से लौटा दिये जाने के बाद बुला लिये गए। अमिताभ बच्चन उन्हें छोटा भाई कहते हैं। मुलायम सिंह मनाने चले जाते हैं। तभी तो वो अमर हैं। लेकिन एक शिकायत है। हिंदी में नहीं लिख रहे हैं। इंग्लिश में लिख रहे हैं। शायद इसीलिए वे खुद को अब ग्लोबल नागरिक कहने लगे हैं।

ravish@ndtv.com

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