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टेलरिंग से स्लम एरिया में स्वरोजगार की अलख

जो कल तक घर में चूल्हा-चौका करके अपना समय काट रही थीं, आज उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद नजर आने लगी है। स्लम एरिया में रहने वाली करीब सैंकड़ों लड़कियां कटिंग टेलरिंग का प्रशिक्षण प्राप्त करके घरेलू काम में हाथ बंटा रही हैं।
 
इनमें से कई लड़कियां ऐसी हैं, जिन्होंने स्वरोजगार की राह अपनानी शुरू कर दी है। पिछले दो साल में सेक्टर-62 स्थित अरबिंदो सोसाइटी में तीन सौ से अधिक लड़कियां कटिंग टेलरिंग का हुनर सीख चुकी हैं। बीस लड़कियों के बैच में चलने वाले चार महीने के कोर्स को सिखाने का बीड़ा लेफ्टीनेंट कर्नल (रिटायर्ड) एम. के. निगम व उनकी पत्नी जयश्री निगम ने उठाया था।

सन् 2007 में 35 लड़कियों के साथ बैच की शुरुआत के बाद अब तक नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली व गाजियाबाद के स्लम एरिया से आने वाली तीन सौ से अधिक लड़कियां लेडीज वर्क (कटिंग, इंब्राइडरी, मोती व ग्लास) सीख चुकी हैं।

प्रशिक्षण के शुरुआती दौर में जन शिक्षण संस्थान गौतमबुद्ध के निदेशक अजय कुमार सिंह ने यहां आकर लड़कियों को हाथ व मशीन से काम करते हुए देखा था। कुछ समय बाद सोसाइटी को संस्थान की ओर से मान्यता मिल गई। वर्तमान समय में दस से लेकर 25 साल उम्र की 15 से अधिक लड़कियां अपने पैरों पर खड़े होने के लिए परीक्षाओं से गुजरने की तैयारी कर रही हैं। 

12वीं के बाद से लड़कियों को दे रही हैं ट्रेनिंगः अरबिंदो सोसाइटी में इन दिनों स्लम एरिया में रहने वाली लड़कियों को कटिंग, टेलरिंग व इंब्राइडरी का प्रशिक्षण देने वाली रीना गुप्ता बताती हैं कि उन्होंने 12वीं के बाद से ही ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी थी। शादी से पहले वे दुर्गापुर में जरूरतमंद लड़कियों को ट्रेंड करती थीं।

वर्तमान समय में नोएडा स्थित अरबिंदो सोसाइटी में वे उन्हें प्रशिक्षण दे रही हैं। इससे पहले बैच में ट्रेनिंग ले चुकी कई लड़कियां स्वरोजगार अपना चुकी हैं। उन्हें चार साल के ट्रेनिंग प्रोग्राम में चार बार परीक्षाओं से गुजरना होता है। उसके बाद उन्हें प्रमाण पत्र दिया जाता है।

 

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  • Web Title:टेलरिंग से स्लम एरिया में स्वरोजगार की अलख