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कसाब व तालिबान से जुड़ी घटनाओं का बाजार रहा गर्म

जुलाई के महीने में भारत अमेरिका और पाकिस्तान में कसाब, अल कायदा और तालिबान के रूप में आतंकवाद का मुद्दा चर्चा में रहा। इस दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शर्म अल शेख सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान में आतंकवाद की जड़े होने का मुद्दा उठाया और विश्व के देशों से इसके खात्मे के लिए प्रयास करने का आग्रह किया।

वाशिंगटन (एक जुलाई) अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा और अल कायदा से जुड़े चार पाकिस्तानी उग्रवादियों पर प्रतिबंध लगाया। इन चारों पर प्रतिबंध मुंबई ट्रेन और समझौता एक्सप्रेस में हुए बम विस्फोटों सहित अन्य आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण लगाया गया।

इस्लामाबाद (दो जुलाई) कश्मीरियों के आत्म निर्णय के अधिकार की वकालत करते हुए पाकिस्तान ने दावा किया कि राज्य की स्थिति बहुत खराब है और इसे प्रशासनिक तथा राजनीतिक उपायों से नहीं सुलझाया जा सकता।

मेलबर्न (तीन जुलाई) भारतीय छात्रों पर नस्लीय हमलों की घटनाओं के बाद आस्ट्रेलिया ने उन्हें पूर्ण सुरक्षा, कल्याण और रहने की सुविधा देने का आश्वासन दिया।

लिनदाउ : जर्मनीअ (पांच जुलाई) नोबेल विजेता राजेंद्र पचौरी ने कहा कि विकसित देशों को ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन घटाने और जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

लाक्विलाः इटली (नौ जुलाई) आतंकवाद को विश्व शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए समूह आठ के देशों ने इसके हर रूप की निंदा की और कहा कि इसके खात्मे के प्रयासों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान को प्रमुखता दी जानी चाहिए।

इस्लामाबाद (11 जुलाई) पाकिस्तानी सेना ने माना कि वह मुल्ला मोहम्मद उमर सहित अन्य अफगान तालिबान नेताओं के संपर्क में है और उन्हें अमेरिका के साथ बातचीत के लिए सहमत भी कर सकती है बशर्ते वाशिंगटन भारत को लेकर उनकी चिंता दूर करे।

काठमांडू (12 जुलाई) भारत और नेपाल ने जल संसाधन प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

इस्लामाबाद (13 जुलाई) पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधित जेयूडी प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद की रिहाई के विरोध में दो याचिकाएं दायर किए जाने के एक सप्ताह बाद अधिकारियों से हाफिज को हिरासत में लेने के लिए ठोस आधार मुहैया कराने को कहा।

शर्म अल शेख (15 जुलाई) प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचों के खात्मे के लिए कड़ी वकालत करते हुए देशों से अपील की कि वे आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह न दें।

इस्लामाबाद (17 जुलाई) पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को 1999 में असैन्य क्रांति से सत्ता हथियाने वाले पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ द्वारा उनकी सरकार पर लगाए गए विमान अपहरण करने संबंधी आरोपों से बरी करते हुए चुनावी राजनीति में उनकी वापसी की राह बनाई।

वाशिंगटन (18 जुलाई) ओबामा प्रशासन ने प्रख्यात भारतीय अमेरिकी राजन आनंद को कृषि मंत्रालय में महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर उन्हें देश के 306 मिलियन आबादी के पोषण दर्जे (न्यूट्रीशन स्टेटस) में सुधार का जिम्मा सौंपा।

मेलबर्न (19 जुलाई) नई दिल्ली दौरे से पहले आस्ट्रेलिया के आब्रजन मंत्री क्रिस इवान्स ने कहा कि उनका देश नस्लवादी नहीं है और अध्ययन के लिए एक सुरक्षित स्थान है।

यरूशलम : बराक ओबामा प्रशासन को झटका देते हुए इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पूर्वी हिस्से में निर्माण कार्य रोकने की अमेरिका की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि पवित्र शहर पर यहूदी संप्रभुता को चुनौती नहीं दी जा सकती।

इस्लामाबाद (20 जुलाई) अजमल कसाब द्वारा 26 नवंबर के हमले में अपनी भूमिका स्वीकार करते हुए और अन्य साथियों के नाम बताने के बाद पाकिस्तान ने कहा कि कसाब का बयान एकतरफा है और दबाव में दिए गए इस बयान के आधार पर उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।

इस्लामाबाद (22 जुलाई) इस्तीफे के 11 माह बाद कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ को सुप्रीम कोर्ट ने अपने समक्ष पेश हो कर यह बताने के लिए कहा कि उन्होंने नवंबर 2007 में आपातकाल क्यों लगाया था और 60 जजों को बर्खास्त क्यों किया था।

काठमांडू (23 जुलाई) माओवादियों की भारत से हथियार न खरीदने की चेतावनी के बाद नेपाल सरकार ने कहा कि वह अपनी सेना के लिए नई दिल्ली से हथियार नहीं बल्कि केवल तार्किक समर्थन चाहती है।

वाशिंगटन (25 जुलाई) अमेरिकी सीनेट ने रक्षा बजट के लिए 680 अरब डॉलर की मंजूरी दी जिसमें पाकिस्तान के लिए सैन्य सहायता भी शामिल है। लेकिन यह भी कहा कि पाक इस राशि को केवल अलकायदा और तालिबान के खिलाफ ही इस्तेमाल करेगा।

इस्लामाबाद (28 जुलाई) पाकिस्तान ने कहा कि वह मुंबई हमला मामले में जमात उद दावा प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद को गिरफ्तार नहीं कर सकता क्योंकि इस बारे में उसके पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं।

वाशिंगटन (30 जुलाई) अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी दूत रिचर्ड होलब्रुक ने कहा कि पाकिस्तानी नेताओं ने बलूचिस्तान में भारत की कथित संलिप्तता का मुद्दा उठाया लेकिन इस बारे में कोई विश्वसनीय सबूत नहीं दिए।

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