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बच्चों में बढ़ता मोटापा एक बड़ी समस्या

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में पांच साल से कम आयु के करीब दो करोड़ 20 लाख बच्चों अपने वजन से अधिक पाए गए। अपने वजन से अधिक और मोटे बच्चों की संख्या का 75 प्रतिशत से अधिक कम और मध्यम आय वाले देशों में रहता है।

21वीं शताब्दी में जन-स्वास्थ्य चुनौतियों में जो एक गंभीर समस्या हमारे सामने आ रही है वह है, बचपन से मोटापा। वर्तमान समय में यह समस्या पूरी दुनिया में फैल गयी है और इसका सीधा प्रभाव कम और मध्यम आय के देशों पर पड़ रहा है, विशेष रूप से शहरों में यह समस्या अधिक पायी जा रही है।

बचपन में खाऩ-पान की ओर ध्यान नहीं देने और शारीरिक व्यायाम नहीं करने के कारण बच्चों का वजन बढ़ जाता है और वे मोटे हो जाते है। इसको साधारण भाषा में हम यह कह सकते है कि बचपन में मोटापा शारीरिक उर्जा में असंतुलन के कारण होता है। हम जितनी केलोरी लेते है उतनी खपत नहीं करते है जो शारीरिक व्यायाम के माध्यम से कम की जा सकती है।

दुनिया भर में पिछले कुछ सालों के दौरान बच्चों का वजन और मोटापा बढ़ने का मुख्य कारण उनके खाऩ-पान के तरीकों में भारी बदलाव है। उनके नियमित भोजन में अधिक फैट और केलोरी की मात्रा में भारी वद्धि हुई है जबकि अन्य विटामिन, खनिज और अन्य स्वास्थ्यकारक पदार्थों में कमी आयी है। दैनिक दिनचर्या में तेजी से परिवर्तन के कारण शारीरिक व्यायाम में भारी कमी आयी है।

अपने वजन से अधिक और मोटे बच्चों आगे चल कर जब वयस्क होते है तो वे युवावस्था में ही गैर संचारी रोगों जैसे मधुमेह और हृदयरोगों के शिकार हो जाते है। अधिक वजन और बचपन में मोटापे से होने वाले अधिकांश रोगों को रोका जा सकता है, बशर्ते बचपन में मोटापे को कम करने को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाये।

डब्ल्यूएचओ का मानना है कि समाज में तेजी से आ रहे बदलाव के कारण बचपन में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों में मोटापा बढने का सीधा संबंध खानपान में स्वास्थ्यवर्धक भोजन की कमी और शारीरिक गतिविधियों के स्तर में कमी आना है लेकिन इसका प्रभाव अन्य गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।

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