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धमाकों से थर्राता रहा पाक, 3000 से ज्यादा की मौत

2009 में पाकिस्तान ने अप्रत्याशित रूप से आतंकवादी हमले देखे। देश में राजनीतिक उथल-पुथल रही औरपिछले साल मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के षड़यंत्रकारियों को सजा न देने की वजह से भारत-पाक संबंधों में गतिरोध भी आया।

सबसे ज्यादा मौत   
देश में इस साल लगातार आतंकवादी हमले और आत्मघाती बम विस्फोट हुए जिससे आतंकवादी हिंसा में मरने वालों की संख्या इस साल सर्वाधिक 3000 से ज्यादा रही। विश्व में पाकिस्तान सर्वाधिक खतरनाक स्थान बन गया।
   
पाकिस्तान ने हालांकि देश की सुरक्षा को चुनौती दे रहे समूहों पर शिकंजा कसने की कोशिश की लेकिन भारत इस बात को लेकर अब तक सहमत नहीं है कि पड़ोसी देश ने 166 व्यक्तियों को मौत की नींद सुलाने वाले मुंबई हमलों के षड़यंत्रकारियों के खिलाफ पर्याप्त कदम उठाए हैं।

जून में येकतेरिनबर्ग में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात हुई। जुलाई में मिस्र के शर्म अल शेख में वे अपने पाकिस्तानी समकक्ष यूसुफ रजा गिलानी से मिले। लेकिन कई मुद्दों खास कर पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां चला रहे आतंकवादी संगठनों से निपटने के मुद्दे को लेकर दोनों पक्ष अपने मतभेद दूर नहीं कर पाए।

पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पीपीपी नीत गठबंधन सरकार के लिए आतंकवादी लगातार चुनौती बनते रहे। पीपीपी प्रमुख और करीब एक साल पहले राष्ट्रपति बने जरदारी की स्थिति भी इस साल कमजोर हुई।

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में जरदारी तथा उनके सहयोगियों को निरस्त हो चुके एक कानून के तहत दी गई माफी रद्द कर दी, जिससे उनके लिए संकट पैदा हो गया है ।
 
दहल उठा पाकिस्तान
पाकिस्तान ने भारत पर बलूचिस्तान में दखल देने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि उसके पास इस बारे में सबूत हैं। भारत ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया।
   
देश के पश्चिमोत्तर प्रांत में सुरक्षा बलों ने तहरीक ए तालिबान, अल कायदा और विदेशी उग्रवादियों के खिलाफ अभियान चलाया और उनके खिलाफ कई आत्मघाती हमले हुए। देश का कोई भी हिस्सा इन हमलों से नहीं बचा। आतंकवादियों ने सेना के रावलपिंडी स्थित मुख्यालय पर, पेशावर और मुल्तान में आईएसआई के कार्यालयों पर तथा कई अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमला किया।
   
मई में स्वात घाटी में तालिबान ने शांति समझौते का फायदा उठाते हुए अपना प्रभाव इस्लामाबाद से 100 किमी दूर तक स्थित जिलों में फैलाया। इसके बाद सेना ने उसके खिलाफ अभियान चलाया। आतंकी हमलों से लहूलुहान वजीरिस्तान में भी सेना ने अभियान चलाया। दोनों अभियानों में सेना ने 2,000 से अधिक विद्रोहियों को मार गिराने का दावा किया। लेकिन हकीमुल्ला मेहसूद के नेतृत्व में तालिबान ने कहा कि उसके हौसले पस्त नहीं हुए हैं।

पेशावर के भीड़ भरे बाजार में, मुल्तान और पेशावर स्थित आईएसआई के कार्यालयों में, लाहौर में पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों और एक व्यवसायिक केंद्र पर तथा इस्लामाबाद में नौसेना के मुख्यालय पर आतंकवादी हमलों में 400 से अधिक लोग मारे गए।

हाफिज और लखवी को पनाह
मुंबई हमलों का प्रमुख षड़यंत्रकारी जमात उद दावा (जेयूडी) प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद लगातार जेल से बाहर रहा, क्योंकि इस्लामाबाद का कहना है कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। जेयूडी पर भी पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर प्रतिबंध नहीं लगाया और यह संगठन फलाह-ए-इन्सानियत के नाम से अपनी गतिविधियां चला रहा है।

मुंबई हमलों में संलिप्तता के आरोप में पाकिस्तानी जांचकर्ताओं ने लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर रहमान लखवी सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है। लेकिन बंद कमरे में इनके खिलाफ सुनवाई से विवाद और भ्रम पैदा हुआ। सुरक्षा विशेषज्ञों का भी कहना है कि भारत में विरोधी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद आदि के खिलाफ कुछ नहीं किया गया, जबकि बड़े हमलों के पीछे उनका हाथ रहता है और स्थानीय तालिबान पर दोष मढ़ दिया जाता है।

आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए पाकिस्तान पर साल भर पश्चिमी देशों से दबाव पड़ता रहा। अमेरिका ने बार-बार देश से मुंबई हमलों के दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए कहा। मुंबई हमलों के लिए लश्कर-ए-तैयबा को जिम्मेदार ठहराते हुए ब्रिटिश संसद की एक समिति ने यहां तक कहा कि लंदन, मैड्रिड, बाली सहित दुनिया के कई हिस्सों में हुए बड़े हमलों का मूल स्रोत पाकिस्तान के कबायली इलाकों में है।
   
भारत ने बार-बार दोहराया कि जब तक पाकिस्तान मुंबई हमलों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, उसके साथ कोई बातचीत नहीं होगी। लेकिन पाक ने मुंबई हमलों के बाद बाधित हुई भारत-पाक वार्ता को पुन: शुरू करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए।

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