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उल्फा नेताओं की गिरफ्तारी रही सुर्खियों में

उल्फा को अपने गठन के बाद सबसे बड़ा झटका इस साल लगा जब उसके शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी हुई। उग्रवादी संगठनों की हिंसा राज्य में कम नहीं हुई और तेलंगाना मुद्दे के बाद पृथक राज्य की मांग ने असम में भी जोर पकड़ लिया।

बांग्लादेश में शेख हसीना की अवामी लीग की सत्ता में वापसी के साथ ही उल्फा पर दबाव बनने लगा था। उल्फा के कई कैडर बांग्लादेश में छिपे हैं।

उल्फा के स्वयंभू वित्त सचिव चित्रबन हजारिका और विदेश सचिव सशधर चौधरी को बांग्लादेश अधिकारियों ने छह नवंबर को त्रिपुरा भेज कर असम पुलिस के हवाले कर दिया। लेकिन संप्रभु राज्य की मांग कर रहे समूह के लिए सबसे बुरी खबर उसके अध्यक्ष अरबिन्द राजखोवा और उप कमांडर इन चीफ राजू बरूआ की गिरफ्तारी रही।

राजखोवा और बरूआ की गिरफ्तारी के साथ ही उल्फा के साथ शांति वार्ता की उम्मीद नजर आई लेकिन समूह ने संप्रभुता की मांग त्यागने से इंकार कर दिया।

राज्य में अन्य उग्रवादी समूहों एनडीएफबी और दीमा हलम दाओगाह (जेवेल) को भी झटका लगा। गोविन्द बसुमतारी के नेतृत्व में एनडीएफबी के उग्रवादियों के एक समूह ने मुख्यधारा से जुड़ कर शांति प्रक्रिया का समर्थन करने का फैसला किया। दीमा हलम दाओगाह (जेवेल) के नेता जेवेल गारलोसा को बेंगलूर में गिरफ्तार कर लिया गया जिसके बाद उनके समूह ने संघर्षविराम का ऐलान कर दिया।

वर्ष 2009 में असम ने तीन राज्यपाल देखे। इनमें से वयोवद्ध कांग्रेसी शिव चरण माथुर का निधन हो गया, सैयद सिब्ते रजी भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद स्थानांतरित किए गए और फिर वरिष्ठ कांग्रेसी तथा उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री जेबी पटनायक राज्यपाल बनाए गए।

राजखोवा और बरूआ की गिरफ्तारी भी विवादों में घिरी। पड़ोसी देश में उन्हें हिरासत में लिए जाने की और भारतीय अधिकारियों के हवाले करने की खबरें शुरू में गोपनीय रहीं। चार दिसंबर को बीएसएफ ने दावा किया कि राजखोवा के नेतृत्व में उल्फा के दस सदस्यों ने मेघालय में भारत बांग्लादेश सीमा पर डावकी के पास आत्मसमर्पण कर दिया।

बाद में राजखोवा और बरूआ ने आत्मसमर्पण की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि भारत के हवाले किए जाने से पहले उन्हें बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किए गए राजखोवा और बरूआ ने स्पष्ट कहा कि वार्ता प्रक्रिया में संप्रभुता का मुद्दा शामिल किए जाने पर ही वे बातचीत करना चाहेंगे लेकिन बातचीत हथकड़ी में नहीं होगी।

समझा जाता है कि उल्फा का कमांडर इन चीफ परेश बरूआ म्यांमार में है। उधर केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदम्बरम और मुख्यमंत्री तरूण गोगोई साफ कह चुके हैं कि उल्फा के साथ बातचीत तब ही की जा सकती है जब वह हिंसा और संप्रभुता की मांग त्याग देगा।

लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और उसकी सहयोगी बोडो़ पीपुल्स फोरम (बीपीएफ) ने आठ सीटें जीतीं। पिछले चुनावों में इनकी संख्या 10 थी। भाजपा ने पिछले चुनाव में दो सीटें जीती थीं और इस बार उसने चार पर फतह दर्ज की। असम गण परिषद केवल एक ही सीट जीत पाई।

फरवरी के बाद से नॉर्थ कछार हिल्स इलाके में डीएचडी-जे की हिंसा का कहर जारी रहा। समूह ने सुरक्षा बलों और रेलवे कर्मियों के साथ साथ ईस्ट-वेस्ट कारीडोर के निर्माण में जुटी कंपनियों के कर्मचारियों को भी निशाना बनाया। हिंसा में 50 से अधिक लोग मारे गए और करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

सुरक्षा बलों ने डीएचडी-जे के शीर्ष नेता गारलोसा को जून में बेंगलूरु में गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले नॉर्थ कछार हिल्स स्वायत्तशासी परिषद के प्रमुख कार्यकारी मजिस्ट्रेट मोहित होजाई तथा दो सरकारी कर्मचारियों को परिषद की धन राशि उग्रवादियों को देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

निचले असम में बोडोलैंड भूभागीय प्रशासित जिलों (बीटीएडी) के तहत आने वाले छह जिलों में भी हिंसा जारी रही और करीब 90 लोग मारे गए।

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