class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

त्रिपुराः उग्रवाद पर लगाम कसने में मिली सफलता

वर्ष 2009 में त्रिपुरा में उग्रवाद पर लगाम कसने में सफलता मिली और लोकसभा तथा पंचायत चुनावों में सत्तारूढ़ वाम मोर्चा ने जीत दर्ज की। राज्य में मात्र 40 दिनों में दो राज्यपालों का शपथ लेना खास बात रही।

सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक रमन श्रीवास्तव ने घोषणा की कि बांग्लादेश से भारतीय भूभाग में पूर्वोत्तर के उग्रवादियों का प्रवेश रोकने के लिए 856 किमी लंबी भारत-बांग्ला सीमा पर नौ सीमा चौकियों की स्थापना की जाएगी और 17 सीमा चौकियों का स्थान बदला जाएगा।


उन्होंने कहा कि बीएसएफ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जीरो लाइन के समीप 26 सीमा चौकियों की स्थापना के लिए नयी भूमि की तलाश कर रहा है। इन चौकियों की स्थापना के बाद भारत-बांग्ला सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी ताकि पड़ोसी देशों से उग्रवादी भारतीय भूभाग में प्रवेश न कर सकें। वर्तमान में त्रिपुरा की सीमा पर 245 सीमा चौकियां हैं।

राज्य में मात्र 40 दिनों में दो राज्यपालों ने शपथ ली। राजस्थान की पूर्व उप मुख्यमंत्री श्रीमती कमला को राज्यपाल के तौर पर 15 अक्टूबर को शपथ दिलाई गई। केवल डेढ़ माह में ही उन्होंने गुजरात का प्रभार संभाल लिया और 27 नवंबर को शिक्षाविद डी वाइ पाटिल राज्य के नए राज्यपाल बने। इस साल दो प्रमुख उग्रवादी गुटों आल त्रिपुरा टाइगर फोर्स [एटीटीएफ] और नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा [एनएलएफटी] के 370 से अधिक उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया।

उप महानिरीक्षक [पुलिस नियंत्रण] नेपाल दास ने बताया कि आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों से पूछताछ में पता चला कि उग्रवादी शिविरों में खाद्यान्न का घोर संकट है और उग्रवादियों को धन भी नहीं मिल रहा है जिसकी वजह से वे आत्मसमर्पण करने के लिए बाध्य हो गए।

मुख्यमंत्री मानिक सरकार ने उग्रवाद पर अंकुश लगाने में सफलता के पीछे सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण, सामरिक ठिकानों पर उनकी तैनाती और लचीली भारत बांग्ला सीमा पर तारबंदी को कारण बताया है। वह राज्य को तीन ओर से घेरने वाले पड़ोसी बांग्लादेश की सरकार की भूमिका का भी जिक्र करते हैं।

बांग्लादेश सरकार ने अपने यहां शरण मांगने वाले उग्रवादियों को खदेड़ दिया जिसकी वजह से उल्फा नेताओं चित्रबन हजारिका और सशधर चौधरी सहित कई उग्रवादियों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली।

राजनीतिक क्षेत्र में सत्तारूढ़ वाम मोर्चा ने 23 अप्रैल को राज्य में हुए लोकसभा चुनावों में बाजी मार ली। वाम दलों ने तीन स्तरीय पंचायत चुनावों में 70 फीसदी से अधिक सीटें हासिल कीं। उग्रवादी हिंसा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। उत्तरी त्रिपुरा जिले के पस्परंपरा में 10 नवंबर को एनएलएफटी उग्रवादियों ने सो रहे आठ आदिवासियों को मार डाला। यह बदले की कार्रवाई दो दिन पहले सात उग्रवादियों के आत्मसमर्पण करने की वजह से की गई थी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:त्रिपुराः उग्रवाद पर लगाम कसने में मिली सफलता