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वैश्विक संकट ने 2009 में एफडीआई में लगाई सेंध

लगातार दूसरे साल बरकरार रहे वैश्विक वित्तीय संकट से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह बाधित रहा जिससे सरकार को मजबूरन निवेश के नियम ढीले करने पड़े लेकिन विदेशियों के लिए बहु़-ब्रांड खुदरा व्यापार से अलग रखा गया।

साल 2009 के पहले नौ महीने में एफडीआई 26 फीसदी गिरकर 21.4 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले साल 29 अरब डॉलर था। भारत में 2001 के बाद से कुल एफडीआई प्रवाह 100 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया।

हालांकि धन का प्रवाह कम रहा लेकिन एफडीआई के कारण सात ऋण संस्थानों के स्वामित्व के संबंध में भ्रम पैदा हुआ, जिनमें आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी लिमिटेड शामिल हैं।
   
बैंकों ने कहा कि वे भारतीय हैं और उनका नियंत्रण भारतीय बैंकिंग नियमों, भारतीय निदेशक मंडल और प्रबंधन करता है। केंद्र ने और एफडीआई आकर्षित करने के लिए मानदंडों को आसान बनाया है लेकिन अभी बीमा विधेयक पर संसद की मंजूरी मिलनी बाकी है। इस विधेयक में बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसद करने की मांग की गई है।

इस साल आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) और वॉलमार्ट समेत प्रमुख वैश्विक कंपनियों ने भारत से आकर्षक बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र को एफडीआई के लिए खोलने की मांग की। हालांकि निकट भविष्य में ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
   
वैश्विक स्तर पर ओईसीडी के अनुमानों से स्पष्ट है कि 2009 में 30 ओईसीडी देशों में कुल एफडीआई घटकर 600 अरब डॉलर का हो गया जबकि 2008 में यह 1,020 अरब डॉलर था। इस संकट का केंद्र अमेरिका था इसलिए भारत उन कुछ देशों में शामिल रहा जो अपेक्षाकृत ज्यादा स्थिर रहे।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत में विदेशी निवेश अच्छा रहा और वैश्विक मंदी के बावजूद अच्छी घरेलू मांग और अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर अच्छी रही। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने कहा भारत में पूंजी का आना अचरज की बात नहीं है, पूंजी मौकों का पीछा कर रही है।
  
ओईसीडी चाहता है कि भारत अपने एफडीआई नियमों और विशेष तौर पर खुदरा, बैंकिंग ओर बीमा क्षेत्र में इन्हें विशेष तौर पर उदार बनाने की जरूरत है, जिसमें वैश्विक निवेशकों की रूचि है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने हाल ही में कहा कि भारत की बहु ब्रांड खुदरा नीति देश के लाखों छोटे कारोबारियों की सामाजिक सुरक्षा के तौर पर काम करती है। एक संसदीय समिति ने खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की

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