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लंबी सड़कों पर सफर हुआ सुहाना

वर्ष 2008 में धीमी गतिविधियों के बाद देश भर में राजमार्ग का विकास फिर से जोर पकड़ने लगा है। सरकार की ओर से वर्ष 2009 में 20,000 करोड़ रुपए की राजमार्ग परियोजनाओं के आवंटन का असर सड़क विकास से जुड़ी गतिविधियों में तेजी में रूप में देखा जा सकता है।

मुंबई को सी-लिंक का तोहफा
इसी वर्ष मुंबई में देश का पहला और सबसे लंबा समुद्री पुल 'सी-लिंक' का श्रीगणेश हुआ, जिससे मुंबईवासियों की ट्रैफिक संबंधी समस्या कुछ कम हुई।

पिछले साल राजमार्ग नियामक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) वैश्विक मंदी के कारण अपनी कुल परियोजनाओं में से 80 फीसदी के लिए बोलीदाताओं को आकर्षित करने में विफल रहा था। एक अधिकारी ने कहा कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी के साथ परिवहन मंत्रालय चालू वित्त वर्ष के अंत तक 24 और परियोजनाओं के लिए बोली आमंत्रित करने हेतु तैयारी कर रहा है। मंत्रालय को बोली के संबंध में अच्छी प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है।

12,000 किमी लंबी राह
इस साल मई में मंत्रालय की ओर से उठाए गए कदम से राजमार्ग विकास परियोजनाओं में गति आई। मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के तहत एक लाख करोड़ रुपए के निवेश वाली 12,000 किलोमीटर सड़क के निर्माण से जुड़ी कार्य योजना को तैयार किया।

परिवहन मंत्री कमलनाथ ने हाल ही में कहा था कि वित्त वर्ष 2010-11 के लिए तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश से 12,000 किलोमीटर सड़क के विकास के लिये एनएचएआई ने कार्ययोजना तैयार कर ली है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस वर्ष की दूसरी छमाही में योजना आयोग के सदस्य बीके चतुर्वेदी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति को राजमार्ग परियोजनाओं विशेषकर पीपीपी माडल के तहत आने वाली परियोजनाओं में तेजी लाने के उपाय सुझाने थे।

बुनियादी ढांचों से जुड़ी कैबिनेट समिति ने चुतुर्वेदी समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है जिसमें बोली में भाग लेने हेतु कंपनियों के लिए जरूरी तकनीकी अनुभव की शर्तों को कम करने समेत अन्य बातें कही गई हैं।

18,650 किमी लंबा एक्सप्रेसवेज नेटवर्क
देश में एक्सप्रेसवेज नेटवर्क के विस्तार का मुद्दा भी सरकार के एजेंडे में शामिल है। सरकार 3.35 लाख करोड़ रुपए के निवेश से 18,650 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवेज नेटवर्क के निर्माण की अपनी महत्वकांक्षी योजना के संबंध में कार्य योजना तैयार कर रही है।

कमलनाथ ने कहा कि वह एक्सप्रेसवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया के गठन की प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं। यह प्राधिकरण सड़क निर्माण की जरूरतों पर गौर करेगा।

मंत्री ने अगले दो साल में 400-400 किलोमीटर से अधिक लंबी 10 बड़ी परियोजना आबंटित किए जाने का भी खुलासा किया है। 4,000 किलोमीटर सड़क निर्माण से जुड़ी ये परियोजनाएं राजस्व हिस्सेदारी आधार पर आवंटित की जाएंगी। इसके तहत डेवलपर्स शुल्क का एक हिस्सा सरकार को देंगे।

एनएचएआई पहले ही संभावित बोलीदाताओं से राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश की इन 10 परियोजनाओं में दो के लिए अनुरोध पत्र मंगा चुका है।

हाईटैक सफर
देश में सड़कों का जाल बिछाने के साथ सरकार टोल प्लाजा पर उच्च प्रौद्योगिकी आधारित स्वाचालित प्रणालियां लगाने की भी तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार इन परियोजनाओं को सर्वप्रथम पानीपत, जालंधर, सूरत, दहिसर और गुड़गांव-कठपुतली के बीच शुरू किया जाएगा। बाद में धीरे-धीरे इसे देश के अन्य भागों में भी लागू कर दिया जाएगा।

बजट का मिला साथ
इन महत्वकांक्षी परियोजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए 2009-10 के बजट में आवंटन को बढ़ाकर 4,140.55 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इसी प्रकार एनएचडीपी के आवंटन को बढ़ाकर 8,578.45 करोड़ रुपए कर दिया गया है जबकि 2008-09 में यह 6,972.47 करोड़ रुपए था।
   
बजटीय आवंटन के अलावा विश्व बैंक ने सड़क परियोजनाओं के लिए 3 अरब डॉलर की सहायता देने का भी ऐलान किया है। साथ ही सरकार की सड़क परियोजनाओं के लिए विश्व बैंक से दो अरब डॉलर की सहायता और प्राप्त करने की योजना है।

चतुर्वेदी समिति के अनुसार 2030-31 तक राष्ट्रीय राजमार्ग के विकास के लिए 8.13 लाख करोड़ रुपए की जरूरत होगी।

बहरहाल सड़क परियोजनाओं को गति देने के लिए सरकार को जमीन अधिग्रहण जैसे जटिल मुद्दों को भी सुलझाना होगा।

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