class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बाजार से बचते दिखे छोटे व खुदरा निवेशक

कॉरपोरेट क्षेत्र के मर्चेंट बैंकरों के साथ सांठ-गांठ के जरिए अधिक धन कमाने के लोभ में आरंभिक सार्वजनिक पेशकशों की कीमत आवश्यकता से अधिक करने की खबरों के बीच वर्ष 2008 के दौरान मंदी की आंच में अपने हाथ जला लेने के बाद लघु और खुदरा निवेशक वर्ष 2009 में आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) बाजार से बचते दिखाई दिए।

विश्लेषकों ने तो यहां तक कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा कि अगर बाजार आईपीओ की पुनः व्याख्या करे कि यह संभवतः अधिक कीमत वाला है। उन्होंने अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर की फरवरी 2008 की पेशकश के बाद से अधिक कीमतों वाले सार्वजनिक पेशकशों के कारण खुदरा निवेशकों को लगातार लग रहे झटकों का उदाहरण पेश किया।
 यह शेयर अभी भी, जिस कीमत पर इसे जारी किया गया और सूचीबद्ध हुआ, से काफी कम कीमत पर कारोबार में हैं।

हाल तक एडीएजी फर्म रिलायंस मनी के मुख्य कार्याधिकारी रहे और अब स्पाइस ग्रुप के वित्तीय सेवा व्यवसाय के प्रमुख सुदीप बंधोपाध्याय ने कहा कि अधिक मूल्य लगाने (ओवरप्राइसिंग) के कारण निवेशकों के लिए लाभ का अंश काफी कम बच रहा है।

वह बाजार की इस खतरनाक प्रवृत्ति के बारे में आगाह करने वाले अकेले व्यक्ति नहीं हैं। एक प्रमुख बाजार विश्लेषक अरुण केजरीवाल ने कहा कि आईपीओ का कीमत निर्धारण कार्य आक्रामक बना हुआ है तथा मर्चेंट बैंकर निवेशकों का ध्यान निर्गम की ओर आकर्षित करने के नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं क्योंकि वे अपने कमीशन को बढ़ाने के बारे में ज्यादा चिंतित हैं।

इस आशंका का जन्म इस तथ्य से हुआ है कि वर्ष भर पहले कंपनियों ने, चाहे निजी कंपनी हो या सरकारी उपक्रम, 19 निर्गमों के जरिए करीब 19,000 करोड़ रुपए जुटाए, लेकिन ऐसी अधिकांश कंपनियों के शेयर पेशकश मूल्य से कहीं कम दाम पर कारोबार में हैं। इसके मुकाबले वर्ष 2008 में 30 आईपीओ के जरिए 17,000 करोड़ रुपए जुटाए गए, लेकिन इनमें से अधिकांश कंपनियों ने निवेशकों को मामूली से लेकर अच्छा लाभ लौटाया है।

यह अनुभव वर्ष 2007 में कहीं अधिक बेहतर था, जब करीब 100 कंपनियों ने 32,000 करोड़ रुपए जुटाए और निवेशकों को आकर्षक लाभ दिया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बाजार से बचते दिखे छोटे व खुदरा निवेशक