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भारतीय टेनिस के लिए सौगात लेकर आया 2009

भारतीय टेनिस के लिए बीता साल स्वर्णिम अध्याय की तरह रहा, जिसमें उसके खिलाड़ियों ने चार ग्रैंडस्लैम खिताब जीते और डेविस कप टीम ने भी 11 साल बाद विश्व ग्रुप में जगह बनाई। जबकि देश को सोमदेव देववर्मन और युकी भांबरी के रूप में दो युवा स्टार खिलाड़ी भी मिले। सोमदेव ने साल के पहले एटीपी टूर्नामेंट चेन्नई ओपन 2009 के फाइनल में पहुंचकर भारत के स्वर्णिम अभियान की शुरूआत की। महेश भूपति और सानिया मिर्जा ने इसके बाद साल के पहले ग्रैंडस्लैम ऑस्ट्रेलियाई ओपन का युगल खिताब जीता जबकि युकी भी इस टूर्नामेंट के जूनियर एकल चैंपियन बने। भारतीय टेनिस को हालांकि इससे पहले निराशाजनक स्थिति का भी सामना करना पड़ा जब टेनिस ऑस्ट्रेलिया ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर चेन्नई में होने वाले डेविस कप मुकाबले के लिए अपनी टीम भेजने से इंकार कर दिया। एटीपी ने इसके लिए टेनिस ऑस्ट्रेलिया पर जुर्माना लगाया और भारत ने विश्व ग्रुप प्ले ऑफ में जगह बनाई।

छाए सोमदेव-युकी 
यह साल विशेष तौर पर सोमदेव और युकी के लिए बेहतरीन रहा। साल की शुरूआत एटीपी रैंकिंग में 204वें नंबर के एकल खिलाड़ी के रूप में करने वाले सोमदेव ने 2009 का अंत 126 खिलाड़ी के रूप में किया जबकि इस दौरान करियर की सर्वश्रेष्ठ 116वीं रैंकिंग भी हासिल की।

सोमदेव की तरह युकी ने भी साल की शुरूआत दुनिया के 1156वें नंबर के खिलाड़ी के रूप में की थी जबकि साल का अंत उन्होंने 338वें नंबर के खिलाड़ी के रूप में किया।

सोमदेव ने नए साल का धमाकेदार आगाज करते हुए सत्र के पहले एटीपी टूर्नामेंट चेन्नई ओपन के फाइनल तक का रास्ता तय किया। इस युवा ने फाइनल तक के सफर में दो बार के पूर्व चैंपियन और दुनिया के 42वें नंबर के खिलाड़ी स्पेन के कार्लोस मोया और 25वें नंबर के क्रोएशिया के 25 नंबर के इवो कार्लोविच को हराया।
     
जर्मनी के रेनर शटलर चोट के कारण सेमीफाइनल से हट गए, जिससे सोमदेव ने फाइनल में प्रवेश किया लेकिन उन्हें संघर्षपूर्ण मुकाबले में क्रोएशिया के मारिन सिलिच के हाथों 4-6, 6-7 से शिकस्त झेलनी पड़ी। सोमदेव को भले ही चेन्नई ओपन में शिकस्त का सामना करना पड़ा हो लेकिन उन्होंने सिलिच को लेग मेसन टेनिस क्लासिक में हराकर चेन्नई की हार का बदला चुकता कर लिया। इस युवा ने इसके अलावा पोलैंड के जेर्जी जानोविच को हराकर अमेरिकी ओपन के मुख्य ड्रॉ में जगह बनाई और वह 2002 में प्रकाश अमृतराज के बाद किसी ग्रैंडस्लैम के मुख्य ड्रॉ में प्रवेश करने वाले पहले भारतीय बने। वह हालांकि दूसरे दौर में हारकर बाहर हो गए।

सोमदेव ने अपनी क्षमता का असली लोहा डेविस कप में मनवाया। उन्होंने चीनी ताइपे के खिलाफ अपने दोनों अहम एकल मुकाबले जीते। उन्होंने दुनिया के 59वें नंबर के येन सुन ल्यू को सीधे सेटों में 6-1, 6-2, 6-3 से हराकर भारत को जीत दिलाई।
   
सोमदेव की तरह युकी ने भी 2009 की धमाकेदार शुरूआत करते हुए साल के पहले ग्रैंडस्लैम ऑस्ट्रेलियाई ओपन का जूनियर खिताब जीता। पूरे टूर्नामेंट के दौरान केवल एक सेट गंवाने वाले युकी ने फाइनल में जर्मनी के एलेक्सेंड्रोस फर्डिनेंडोस को सिर्फ 57 मिनट में 6-3, 6-1 से हराया। मात्र 16 बरस की उम्र में जूनियर ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाले युकी यह उपलब्धि हासिल करने वाले चौथे भारतीय हैं। युकी को इसके अलावा विश्व ग्रुप के प्ले ऑफ में दक्षिण-अफ्रीका के खिलाफ खेलने का मौका भी मिला, जहां उन्होंने जीत के साथ शुरूआत करते हुए अपने से बेहतर रैंकिंग वाले इजाक वान डेर मर्व को हराया।
 

पेस-डलूही की जोड़ी
भारत के दिग्गज युगल खिलाड़ी लिएंडर पेस ने चेक गणराज्य के अपने जोड़ीदार लुकास डलूही के साथ फ्रेंच ओपन और अमेरिकी ओपन में पुरूष युगल का खिताब जीता, जबकि डेविस कप टीम ने विश्व ग्रुप प्ले ऑफ मुकाबले में दक्षिण-अफ्रीका को उसी की सरजमीं पर 4-1 से हराकर 11 साल बाद विश्व ग्रुप में जगह बनाकर भारतीय टेनिस को नई बुलंदियों तक पहुंचाया।

पेस ने डलूही के साथ मिलकर 2009 में 15 टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया और इस जोड़ी ने पांच बार सेमीफाइनल या फाइनल का सफर तय किया। इस जोड़ी ने इस दौरान रोलां गैरो पर वेस्ले मूडी और मैग्नस नार्मन की जोड़ी को 3-6, 6-3, 6-2 से हराकर खिताब जीता जबकि उन्होंने अमेरिकी ओपन के फाइनल में भूपति और नोल्स के खिलाफ यही कहानी दोहराई और इसी अंतर से जीत दर्ज की।

पेस और डलूही की जोड़ी फरवरी में रोटरड़ा में भी फाइनल में पहुंची लेकिन डेनिएल नेस्टर और नेनाद जिमोनजिक के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस जोड़ी को ऑस्ट्रेलियाई ओपन के सेमीफाइनल में ब्रायन बंधुओ बॉब और माइक की जोड़ी ने बाहर का रास्ता दिखाया, जिन्होंने बाद में खिताब भी जीता।

अमेरिकी ओपन के बाद पेस ने आराम करने का फैसला किया और फिर वह नवंबर में ही कोर्ट पर जब इस जोड़ी को पहले दौर में ही हार झेलनी पड़ी। यह जोड़ी एटीपी टीम रैंकिंग में चौथे जबकि पेस व्यक्तिगत रैंकिंग में आठवें स्थान पर रहे।


भूपति-नोल्स का सफर
दूसरी तरफ पेस को पुराने जोड़ीदार भूपति ने नोल्स के साथ केवल एक खिताब जीता। यह जोड़ी हालांकि ऑस्ट्रेलियाई ओपन और अमेरिकी ओपन के फाइनल में पहुंची, लेकिन दोनों ही मैचों पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा। भूपति और नोल्स की जोड़ी को मेलबर्न पार्क में ब्रायन बंधुओं ने हराया जबकि फ्लशिंग मिडोज में उन्हें पेस और डलूही के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी।
    
भूपति और नोल्स की जोड़ी साल के अंतिम टूर्नामेंट बार्कलेज एटीपी विश्व टूर फाइनल्स के सेमीफाइनल में भी पहुंची लेकिन यहां भी इस जोड़ी को ब्रायन बंधुओं ने हराया, जिन्होंने बाद में खिताब जीता। ये जोड़ी टीम रैंकिंग में तीसरे जबकि भूपति व्यक्गित रैंकिंग में सातवें स्थान पर रहे।

साल के आखिरी टूर्नामेंट के बाद भूपति ने नोल्स के साथ जोड़ी तोड़ने की घोषणा कर दी। अब वह अपने पुराने जोड़ीदार मैक्स मिरनी के साथ खेलेंगे ।

सानिया की वापसी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय महिला टेनिस का परचम थामने वाली सानिया के लिए भी 2009 काफी यादगार रहा। कभी शीर्ष 25 एकल खिलाड़ियों में शामिल रही सानिया ने चोट के कारण 2008 में शीर्ष 100 से बाहर होने के बाद गत वर्ष जोरदार वापसी की और साल का अंत 57वें नंबर की खिलाड़ी के रूप में किया।

वह महेश भूपति के साथ ऑस्ट्रेलियाई ओपन का मिश्रित युगल खिताब जीतते हुए ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी भी बनी। निजी तौर पर भी उनके लिए 2009 भाग्यशाली रहा और उन्हें हैदराबाद के व्यवसायी के पुत्र और अपने पुराने मित्र सोहराब मिर्जा के साथ सगाई की।

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