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गिनी-चुनी उपलब्धियों के अलावा फीका रहा भारतीय फुटबॉल

ब्रिटिश कोच बॉब हॉटन की मेहनत से भले ही भारतीय फुटबॉल टीम को नया जीवन मिला हो लेकिन अंतरराष्ट्रीय मैचों की कमी का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा, जिससे टीम नेहरू कप का खिताब बरकरार रखने के अलावा कोई विशेष उपलब्धि अपने नाम नहीं कर पाई।

राष्ट्रीय टीम के कप्तान बाईचुंग भूटिया ने इस साल नेहरू कप में अपना 100वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। लेकिन उन्होंने फिर अंतरराष्ट्रीय सरजमीं पर मैच नहीं खेल पाने का राग अलापा, जो हमेशा की तरह अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के कानों तक पहुंचने से पहले ही अपना असर खो देता है। मोहन बागान और भूटिया के बीच करार को लेकर विवाद भी इस वर्ष की सुर्खियों में अव्वल रहा।

नेहरू और सैफ कप की जीत
उपलब्धियों के नाम पर भारतीय फुटबॉल में अगस्त में नेहरू कप और वर्ष के अंतिम महीने में कोच सुखविंदर सिंह की अगुवाई में अंडर-23 टीम का सैफ कप रहा। आई लीग हर साल की तरह नीरस चल रही है, जिसमें हर बार की तरह विदेशी स्ट्राइकरों का दबदबा जारी है। पिछले एक दशक से भारतीय क्लब फुटबॉल के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया और एआईएएफ को समक्षना होगा कि सिर्फ नाम बदलने से कुछ नहीं होगा बल्कि कड़े कदम उठाने होंगे।

नेहरू कप की तैयारियों के लिए टीम को एफसी बार्सिलोना के नोउ कैंप स्टेडियम भेजा गया और फिर एक महीने के ट्रेनिंग कम टूर्नामेंट के बाद टीम में काफी बदलाव देखने को मिले। दिल्ली में खचाखच भरे अंबेडकर स्टेडियम में भारत (156) ने गोलकीपर सुब्रत पाल की बदौलत अपने से ऊंची रैंकिंग पर काबिज सीरिया (95) को सडन डैथ में 6-5 से हराकर अपनी अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफियों की हैट्रिक पूरी की।

नेहरू कप जीत के बाद सुब्रत पाल नायक बन गए और टूर्नामेंट में हॉटन के खिलाड़ियों ने काफी बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनकी अगुवाई में टीम ने 2007 में भी नेहरू कप और 2008 एएफसी चैलेंज कप में खिताब हासिल किया था, जिससे टीम दोहा में 2011 एशिया कप के लिए क्वालीफाई करने में सफल रही थी।

हॉटन का गुस्सा
हॉटन 30 खिलाड़ियों का ऐसा पूल बनाना चाहते हैं, जो उनके अनुसार पूरे वर्ष ट्रेनिंग करे और किसी भी फुटबॉल क्लब की प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले। लेकिन देश की फुटबॉल के विकास का यह कोई स्थायी हल नहीं है इसके लिए अकादमियों का शुरू होना निहायत जरूरी है। देश की टाटा फुटबॉल अकादमी शानदार अकादमी है और फुटबॉल का स्तर सुधारने के लिए ऐसी कई अकादमियां बनाना आवश्यक है।

प्रतिस्पर्धा स्तर को बरकरार रखने के लिए खिलाड़ियों को क्लब फुटबॉल तो खेलना ही होगा, लेकिन हॉटन ने गुस्से में ऐसा इसलिए कहा था कि क्योंकि क्लब उन्हें उपयुक्त ट्रेनिंग और फिटनेस उपलब्ध नहीं करा पाते तथा जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय टीम के लिए उपलब्धता पर भी नखरे दिखाते हैं।

बीसीसीआई की मदद
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) का एआईएफएफ को टीम की एशिया कप की तैयारियों के लिए 25 करोड़ रूपये की राशि देने का फैसला भी सराहनीय था। सरकार भी राष्ट्रीय टीम की मदद करने को आगे आई और उसने भी महासंघ को अंडर-23 टीम के 2010 एशियाई खेलों में हिस्सेदारी के लिए 10 करोड़ रूपये दिए। अंडर -23 टीम ने हाल में सैफ कप अपने नाम किया।

प्रियरंजन की जगह प्रफुल्ल
बीमार चल रहे एआईएफएफ अध्यक्ष प्रियरंजन दासमुंशी की जगह केंद्रीय नागर विमानन प्रफुल्ल पटेल को सौंप दी गई। एआईएफएफ ने हालांकि आईलीग का कायाकल्प करने के तहत इसके कार्यक्रम में कुछ बदलाव करने के फैसला किया है और फीफा गोल प्रोजेक्ट की मदद से देश भर में आधे दर्जन मैदानों पर कत्रिम टर्फ बिछाई गई। क्लब भी अपने हिसाब से थोड़ा बेहतर करने की कोशिश में जुटे हैं, ईस्ट बंगाल क्लब ने सत्र से पहले पुरी में अपना ट्रेनिंग शिविर लगाया, जिसमें फुटबॉलरों को उच्च स्तर की सुविधाएं मुहैया कराई गई जैसे विदेशी क्लबों में कराई जाती हैं।
    
क्लबों ने खिलाड़ियों के वेतन में भी इजाफा किया है। औसतन एक अच्छा खिलाड़ी आई लीग क्लब से साल में करीब 25 लाख रूपए कमाता है। क्लब निपुण सहयोगी स्टाफ रखने पर भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं, जिससे फुटबॉलरों का विकास किया जा सके। कुछ क्लब तो निकट भविष्य में स्थायी वीडियो विश्लेषक रखने की भी योजना बना रहे हैं।
   
भूटिया का 100वां मैच
नेहरू कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे भूटिया ने किर्गीस्तान के खिलाफ अपने करियर का 100वां मैच खेला, जिसमें टीम ने 2-1 से जीत दर्ज की। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय, 37वें एशियाई और 152वें अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर हैं। उन्होंने 14 साल के फुटबॉल करियर में यह कारनामा किया।

क्लब विवाद
इस साल एक डांस रियलिटी शो में भाग लेने के कारण मोहन बागान ने भूटिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया। देश के अनुभवी खिलाड़ी के खिलाफ यह कदम एआईएफएफ, मौजूदा और पूर्व खिलाड़ियों, अधिकारियों, और प्रशंसकों के गले से नीचे नहीं उतर सका, जिसके बाद भूटिया ईस्ट बंगाल से जुड़ गए। मोहन बागान ने इसका भी विरोध किया और बात कानूनी कार्रवाई तक चली गई। हालांकि यह मामला अब भी चल रहा है।

नवंबर-दिसंबर में भारतीय टीम के लिए गोवा में शिविर लगाया गया लेकिन डेम्पो क्लब ने डिफेंडर महेश गवली और समीर नायक को चोटिल करार करते हुए इसमें जाने के लिए रिलीज नहीं किया, जिसके बाद एआईएफएफ ने इन्हें निलंबित कर दिया। लेकिन बाद में क्लब ने इनके मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाकर एआईएफएफ से उन्हें क्लब में शामिल करने की अनुमति मांगी और उन्हें शिविर में शामिल कर लिया गया। इसके लिए डेम्पो को एआईएफएफ के नियम नहीं मानने के कारण अनुशासनात्मक समिति ने पांच लाख का जुर्माना लगाया।

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