class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

परिवर्तन की नई शुरुआत होनी ही चाहिए

सुदेश कुमार महतो झारखंड की राजनीति में दमदार युवा नेता के रूप में उभरे हैं। अभी वह सियासत की राजनीति के केंद्र में हैं। खंडित जनादेश ने उनकी भूमिका को अहम बना दिया है। सुदेश बड़ी चतुराई से गोटी बिछा रहे हैं और सरकार बनाने की दिशा में या अगली सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। वे सिल्ली विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार लगातार चुनाव जीते हैं। 25 वर्ष की उम्र में वह आजसू के इकलौते विधायक बने थे। 2005 में पार्टी में विधायकों की संख्या दो हुई। इस बार यह संख्या पांच पर पहुंची है। अपने दम पर लड़कर उन्होंने यह ताकत समेटी है। 2005 में एनडीए की सरकार बनाने में वे नायक के रूप में उभरे थे। झारखंड में सरकार बनाने की कवायद के बीच सुदेश महतो से रू-ब-रू हुए रांची हिन्दुस्तान के प्रमुख संवाददाता नीरज सिन्हा।

बेमेल की सरकार बनने जा रही है? फिर खटपट होगी?
आजसू स्थिर और मजबूत सरकार बनाने की कवायद में है। सोच में परिवर्तन होगा, तो सब कुछ पटरी पर आएगा। जो जनादेश मिला है उसी में बेहतर रास्ता निकालने की कोशिश होनी चाहिए। पूरे देश में झारखंड की छवि कैसी बनी है यह जगजिहर है। इसे बढ़िया करने की जिम्मेदारी हल दल और नेता पर है। जहां तक जोड़- तोड़ का मामला है, तो यह राजनीति का अहम हिस्सा है। लेकिन जोड़-तोड़ के बीच भी इरादे ठोस हों, तो बेहतर शासन दिया जा सकता है।

शिबू सोरेन के बारे में क्या कहेंगे?
शिबू सोरेन झारखंड के पुराने नेता और बड़े आंदोलनकारी हैं। उनके मन में भी झारखंड के लिए बहुत बातें होंगी। देखिए वह आगे क्या करते हैं। सार्वजनिक जीवन में कई मोड़ आते हैं और इसी के बीच राजनेता भी अपने को ढालने की कोशिश करता है। हम चाहते हैं कि आगे जरूर अच्छा हो। शिबू भी बढ़िया सपोर्ट चाहते हैं।

एनडीए सरकार में आप महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। क्या उपलब्धि हासिल की? 
पथ निर्माण मंत्री की जिम्मेदारी मिली थी तो हर संभव सड़कों की बेहतरी के लिए काम किया। परिणाम भी आए। यह किसी से छुपी नहीं है। लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के साथ शासन व्यवस्था भी बदलती रही। 2005 में गृह मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाली। पुलिस प्रशासन को चुस्त- दुरुस्त करने और कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश की, इस बीच सरकार चली गई। 

झारखंड की राजनीति में क्या यही होता रहेगा?
देखिए, जनादेश का हर कोई सम्मान करता है। इसी में अच्छा करने की कोशिश होनी चाहिए। खंडित जनादेश के बीच भी सरकार गठन की कवायद राजनीतिक प्रक्रिया है। इससे कोई कैसे खुद को अलग करे। पिछले वर्षो में झारखंड की शासन व्यवस्था पटरी से उतरी है इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन आगे भी अंधेरा होगा, इस पर हम विश्वास नहीं करते।

झारखंड पर लगा भ्रष्टाचार का दाग कैसे मिटेगा?
बदनामी की लकीर लंबी होने के बजाय मिटे इसकी इकट्ठे कोशिश होनी चाहिए। देश के कई राज्य परिवर्तन की राह पर निकल पड़े हैं। तो झारखंड क्यों नहीं निकल सकता?

भाजपा- झामुमो की सोच व राजनीतिक विचारधारा एकदम अलग रही है। आजसू की भी धारा अलग है। पहले भाजपा और अब झामुमो के साथ- नहीं लगता यह मौकापरस्ती है?
मौकापरस्ती नहीं कहें। नवनिर्माण की लड़ाई के लिए हम नए रास्ते पर चल रहे हैं। मन में झारखंड की बेहतरी के लिए कई विचार हैं। आजसू राज्य हित में काम करेगी इसका भरोसा दिलाते हैं।

इस बीच खजाने से अरबों निकले, लेकिन विकास जमीन पर नहीं उतरा?
यह सवाल झारखंड के हर इंसान की टीस है इससे हम वाकिफ हैं। लेकिन कब तक निगेटिव होता रहेगा। कहीं से और कभी तो नई दिशा तय होगी। यह सच है कि कृषि- सिंचाई तथा ग्रामीण विकास पर जोर दिया जाना चाहिए। नए सिरे से योजनाएं तय करनी होगी और ईमानदार तथा पारदर्शी शासन से ही यह जमीन पर उतर सकती है। नहीं तो आगे मुश्किलें बढ़ेंगी इससे हम इनकार नहीं कर सकते।

ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन यानी आजसू के अध्यक्ष

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:परिवर्तन की नई शुरुआत होनी ही चाहिए