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रिटर्न की गणना

फंड, स्टॉक मार्केट में निवेश करने पर रिटर्न कितना मिलेगा। इसको जानने की उत्सुकता हरेक के मन में रहती है। इसके लिए जरूरी है कि आप रिटर्न की प्रकृति को समझें। इसमें कई बातें छिपी रहती है। रिटर्न, निवेशक के फैसलों को काफी प्रभावित करता है। रिटर्न मिलने के बाद एक बात पर गौर करना जरूरी है कि वह कितने समय में आपको मिला। ऐसे में जरूरी है कि रिटर्न से जुड़ी कुछ जरूरी बातों को जेहन में रखा जाए।

कितना रिटर्न : किसी भी प्रोडक्ट की जानकारी और उसके विकल्प आपको इस बात की जानकारी देते हैं, कि उससे कितना रिटर्न मिलेगा। पहली नजर में देखने पर आपको ऐसा लग सकता है मिलने वाला रिटर्न बहुत ज्यादा है, लेकिन सामान्यत: ऐसा नहीं होता। कंपनियां रिटर्न को कई तरीके अपनाकर ज्यादा दिखाती है ताकि लोग उस प्रोडक्ट की तरफ आकर्षित हो। उदाहरण के तौर पर डेट में ऐसा इंवेस्टमेंट प्लान है, जो लंबे समय से सात से आठ प्रतिशत रिटर्न दे रहा हो ऐसे में अगर वह प्रोडक्ट  स्पेसिफिक क्षेत्र में दस प्रतिशत का रिटर्न दे रहा हो और उसका पोर्टफोलियो भी उसी डेट इंस्ट्रुमेंट की तरह हो, तो ऐसे में उसके दूसरे विकल्पों की तुलना में वह एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

वार्षिक आंकड़े : प्रोडक्ट का रिटर्न निर्धारण करने से पहले उसके मासिक रिटर्न के साथ वार्षिक पर भी गौर करते रहें। इससे आप दूसरे प्रोडक्ट की तुलना में इसका आकलन कर पाएंगे। उदाहरण के लिए यदि कोई
प्रोडक्ट माह में 1.5 प्रतिशत का रिटर्न देता है और वार्षिक रूप में बदलने पर यह 19.56 प्रतिशत का रिटर्न देता है। वार्षिक रूप में यह रिटर्न देखने में ज्यादा लगता है और मासिक तौर पर कम।

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