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ग्लैमर की भरमार अभिनय बेकार

ग्लैमर की भरमार अभिनय बेकार

इस साल कई नयी अभिनेत्रियों ने बॉलीवुड में कदम रखा। कुछ अभिनेत्रियों की अच्छी चर्चा भी हुई, पर अधिकांश अभिनेत्रियां अभिनय के नाम पर फ्लॉप ही साबित हुईं। कहकशां पटेल और वैशाली देसाई ने बड़ी फिल्मों से डेब्यू किया। ‘देव डी.’ से माही गिल और कल्कि ने अपनी पारी खेली। ये दोनों एक्ट्रेस फिल्म के माहौल और अभिनय के लिहाज से ठीक रहीं। राकेश ओमप्रकाश मेहरा का पूरा ध्यान ‘दिल्ली 6’ में अभिषेक बच्चन और सोनम कपूर पर था। यही कारण था कि गीता बिष्ट, अदिति राव, हैदरी और गीता अग्रवाल जैसी अभिनेत्रियां नोटिस नहीं की गयीं। ‘बारह आना’ की जयति भाटिया, वायलेंते प्लेसिडो और तनिष्ठा चटर्जी में न ग्लैमर था और न अभिनय। पर ‘गुलाल’ की आयशा मोहन और सीमा रहमानी साधारण चेहरे-मोहरे के बावजूद अभिनयशीलता और दमदार पटकथा की बदौलत दर्शकों को प्रभावित कर पाने में सफल रहीं। स्टार किड्स के मामले में श्रुति हसन का डेब्यू भी काफी अच्छा रहा। ‘लक’ में उन्हें नोटिस किया गया। टीवी सीरियलों की अभिनेत्रियों ने भी इस साल हिन्दी फिल्मों में अपने हुस्न और अभिनय के जौहर दिखाने की कोशिश की। कुलराज रंधावा ‘चिंटूजी’ में दिखाई दीं, तो उधर ‘आलू चाट’ में आमना शरीफ ने अपने जलवे बिखेरे। नौशीन अली सरदार ने ‘42 कि.मी.’ से डेब्यू किया। टीवी एंकर श्वेता गुलाटी और अमृता सलूजा का ‘डिटेक्टिव नानी’ में डेब्यू असफल रहा। सीरियल ‘बालिका वधू’ की अविका गौड़ की पहली फिल्म ‘मॉर्निग वाक’ थी। इसके अलावा ‘रॉकेट सिंह’ में शाहजाहन पदमसी ने भी फिल्मों में कदम रखा।

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