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कांशीराम गरीब आवास योजना के मानक बदले

राज्य मंत्रिपरिषद ने गुरुवार को मान्यवर कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना का स्वरूप ही बदलने का निर्णय किया है। अब इस योजना का लाभ लेने वालों को बीपीएल कार्ड धारक होना जरूरी नहीं होगा। मंत्रिपरिषद ने योजना के मकानों के निर्माण की कीमत पौने दो लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रुपए कर दी है।

मंत्रिपरिषद ने यह भी निर्णय किया है कि मालिकाना हक योजना के तहत जिन गरीबों को लाभ नहीं मिल पाया है, उन्हें इस योजना से आवास देने में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए वे पात्र होंगे जिनके पास रहने के लिए पक्की छत नहीं होगी।

मंत्रिपरिषद ने कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना को माँग के अनुरूप बनाने का निर्णय भी किया है। अभी तक मकानों की संख्या का लक्ष्य निर्धारित कर दिया जाता था। अब भूमि उपलब्धता और मकानों की माँग के आधार पर इस योजना के भवनों का निर्माण कराया जाएगा।

वर्ष 2009-10 में आवासों के निर्माण के लिए 20 हजार रुपए आंतरिक विकास का शामिल किया गया है। इस योजना के तहत कम से कम तीन निकायों में न्यूनतम 100 मकान बनाए जाएँगे। जरूरत पड़ने पर मंडलायुक्त की स्वीकृति के बाद चार निकायों से भी काम कराया जा सकता है।

योजना का लाभ  विधवाओं और विकलांगों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर दिया जाएगा। इस श्रेणी के लाभार्थी के पास अगर बीपीएल कार्ड नहीं है तो आय प्रमाण पत्र के आधार पर उसकी पात्रता मानी जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी द्वारा आय प्रमाणपत्र जारी किया जाना आवश्यक होगा।

विकलांग लाभार्थी को 40 प्रतिशत विकलांगता का सीएमओ का प्रमाणपत्र लगाना होगा। आम श्रेणी के आवेदकों को यह बताना होगा कि उसके बाद अपनी कोई आवासीय भूमि नहीं है। उसे यह भी प्रमाणित करना होगा कि वह सम्बन्धित जिले का निवासी है, इसके लिए राशन कार्ड, मतदाता सूची और मतदाता पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा। सामान्य श्रेणी के आवेदकों को गरीबी रेखा से नीचे का होना अनिवार्य होगा, लेकिन उसके पास बीपीएल कार्ड होना जरूरी नहीं होगा। आय प्रमाण पत्र ही मान्य होगा।

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  • Web Title:कांशीराम गरीब आवास योजना के मानक बदले