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फाइलों में गुम हो गई बिहार की रेल परियोजनाएं

रेलवे के क्षेत्र में बिहार के साथ शुरू से ही भेदभाव होता रहा है। यही नहीं परियोजनाओं के मामले में भी बिहार को झुनझुना से अधिक नहीं मिला। पूर्व रेल मंत्री नीतीश कुमार, लालू प्रसाद और रामविलास पासवान के कार्यकाल में भले ही बिहार के हिस्से कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आईं लेकिन मिला जुला कर यह राज्य हाशिये पर ही रहा।

आजादी के बाद विभिन्न वर्षो में बिहार में नई रेल लाइन बनाने, आमान परिवर्तन और दोहरीकरण की कई परियोजनाएं स्वीकृ त हुईं और उनका सर्वेक्षण भी हुआ लेकिन फिर वे फाइलों में ही कैद हो कर रह गईं। सूबे की 2600 किलोमीटर की रेल परियोजनाओं पर काम शुरू हुआ ही नहीं।

रेल मंत्रलय के आंकड़े बताते हैं कि इस तरह की बिहार की 33 परियोजनाएं फाइलों में ही गुम हो गई। इनमें नई रेल लाईन बनाने की 27 परियोजनाएं जिनमें 1938 किलोमीटर रेल लाईन का निर्माण होना था। इसी तरह 127 किलोमीटर की दो परियोजनाएं आमान परिवर्तन से और 499 किलोमीटर की चार परियोजनाएं दोहरीकरण से सम्बद्ध हैं।

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