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विपक्ष ने नहीं चलने दी विधानसभा

लोजपा नेताओं की पिटाई के मुद्दे पर विपक्ष ने बुधवार को भी विधानसभा नहीं चलने दी। पूरा विपक्ष वेल में रहा, कुर्सियां पटकी और जमकर नारेबाजी की। मामला इतना बढ़ गया कि इस मुद्दे पर लोजपा विधायक डा. अच्युतानन्द द्वारा लाये गये विशेषाधिकार हनन की नोटिस अस्वीकार करने को लेकर लोजपा नेता महेश्वर सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी को धृतराष्ट्र की संज्ञा दे डाली। इससे आक्रोशित सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच खूब तू-तू मैं-मैं हुई।

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और जल संसाधन मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव ने विपक्ष पर अनुसूचित जाति से आने वाले विधानसभा अध्यक्ष के अपमान करने का मुद्दा उठाया और विपक्ष का जमकर प्रतिकार किया। स्थिति यह हुई कि विधानसभा अध्यक्ष को कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। न तो प्रश्नकाल चला और न ही शून्यकाल।

बुधवार को कार्यवाही शुरू होते ही राजद के रामचन्द्र पूर्वे खड़े हुए और विधानसभा अध्यक्ष की मनाही के बावजूद बोलने लगे। उन्होंने कहा कि विशेषाधिकार हनन की नोटिस स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार अध्यक्ष के पास है पर नोटिस देने वाले विधायक को अपनी बात सदन में कहने का मौका मिलना चाहिए।

नोटिस विशेषाधिकार हनन लायक है या नहीं इस पर सदन को विचार करना चाहिए। पर विधानसभा अध्यक्ष का कहना था कि एक बार अस्वीकार करने के बाद दोबारा उस पर चर्चा हो ही नहीं सकती।

इस पर विपक्ष के कई विधायक खड़े हो अपनी-अपनी बात कहने लगे। लोजपा नेता महेश्वर सिंह इतने तैश में आ गये कि विधानसभा अध्यक्ष को धृतराष्ट्र कह डाला। बस क्या था, पूरा सदन हंगामे की भेंट चढ़ गया।

सत्ता और विपक्ष के कई विधायक खड़े हो शोर-शराबा करने लगे। उपमुख्यमंत्री ने महादलित का अपमान बताये हुए महेश्वर सिंह को खेद प्रकट करने की नसीहत दी। विजेन्द्र यादव ने तो यह कह डाला ऐसे सदन नहीं चलेगा, महेश्वर सिंह को खेद प्रकट करना ही होगा।

इसके बाद विपक्ष की तरफ से रामचन्द्र पूर्वे, शकील अहमद खां, रामदेव वर्मा, राजेन्द्र प्रसाद सिंह, डा. अशोक कुमार, रामचन्द्र सिंह यादव समेत कई विधायक जोर-जोर से कहने लगे कि जनप्रतिनिधियों का अपमान होगा और सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं होगी तो सदन चलने का औचित्य ही क्या है।

सत्ता पक्ष की तरफ से प्रेम रंजन पटेल, रण विजय सिंह, सुनील कुमार पिन्टु, विनोद नारायण झा समेत कई विधायक खड़े हो विपक्ष से माफी मांगने की बात कहने लगे। हंगामा जारी रहा और सदन की कार्यवाही स्थगित होती रही। बाद में विपक्षी विधायकों ने सदन के बाहर संवाददाताओं से पूरी घटना की विस्तृत जानकारी दी।

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