class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

....जब 'बावरा मन' ने पूरा किया सपना

....जब 'बावरा मन' ने पूरा किया सपना

अगर आप में टैलेंट हो, लेकिन मौके नहीं मिल पा रहे हों तो क्या फायदा। बहुत लोग होते हैं जिन्हें बॉलीवुड में अपनी काबिलियत के बाद भी मुकाम हासिल नहीं होता। और बहुत कम लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें 'लक बाय चांस' ये ब्रेक मिलता है। जबकि जाने-माने गीतकार, गायक और राइटर स्वानंद किरकिरे ऐसे लोगों में शुमार हैं जिनमें टैलेंट तो था ही, लेकिन काफी संघर्ष के बाद उन्हें मौका मिला।

स्वानंद इंदौर में पले-बढे़। उन्होंने 1996 में दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से ग्रैजुएशन किया। इसके बाद वे मुंबई चले गए। जहां उन्होंने काफी संघर्ष किया। फिल्मकार पंकज पराशर के जरिए स्वानंद डायरेक्टर सुधीर मिश्रा से मिले। इसी के साथ स्वानंद को सुधीर मिश्रा की फिल्म 'हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी..' में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर काम करने का मौका मिला।

एक दिन इस फिल्म की शूटिंग के दौरान कुछ लोगों ने स्वानंद से उनकी कविता सुनाने को कहा। फिल्म के अभिनेता केके मेनन को ये कविता बेहद पसंद आई और उन्होंने सुधीर मिश्रा से इसे फिल्म में शामिल करने की गुजारिश भी की। दरअसल ये गाना स्वानंद का 'बावरा मन देखने चला एक सपना..' ही था, जिसे उन्होंने अपने थियेटर के दिनों में लिखा था। डायरेक्टर सुधीर मिश्रा को 'बावरा मन..' काफी पसंद आया और उन्होंने इसे फिल्म में शामिल कर लिया। हालांकि फिल्म आने में देरी हो गई, लेकिन इसके गाने काफी लोकप्रिय हुए जिन्हें बाद में दोबारा रिलीज भी किया गया। इस तरह स्वानंद और शांतुनु मोइत्रा की हिट जोड़ी भी बनी।

'बावरा मन..' को खुद स्वानंद किरकिरे ने ही गाया है। इस तरह बतौर गायक और गीतकार 'बावरा मन..' ने स्वानंद किरकिरे का सपना पूरा किया। इसलिए खुद स्वानंद भी मानते हैं कि उनकी जिंदगी में सपनों की बहुत अहमियत है। उनका एक नाटक 'आओ साथी सपना देखें..' भी कुछ ऐसी ही कहानी पर आधारित है, जिसे स्वानंद अपनी जिंदगी से मिलता-जुलता ही मानते हैं।

(आप अपनी राय puneet.bhardwaj@hindustantimes.com पर दे सकते हैं।)
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:....जब 'बावरा मन' ने पूरा किया सपना