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आर्थिक वृद्धि दर 8 प्रतिशत रह सकती हैः प्रणव मुखर्जी

आर्थिक वृद्धि दर 8 प्रतिशत रह सकती हैः प्रणव मुखर्जी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 7.5 से 8.0 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि कीमत में तेजी और राजकोषीय घाटा चिंता का विषय बना हुआ है।

उद्योग मंडल पीएचडीसीसीआई की 104वें सालाना सत्र को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा, मध्यावधि समीक्षा में वृद्धि दर 7.75 प्रतिशत (2009-10 के लिए) रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है लेकिन यह कहना ज्यादा बेहतर होगा कि यह (वृद्धि दर) 7.5 प्रतिशत से 8.0 प्रतिशत रह सकती है।

वित्त मंत्री ने मध्यावधि समीक्षा को पिछले सप्ताह सदन में पेश किया था। समीक्षा में कहा गया है कि वृद्धि दर 7.75 प्रतिशत रह सकती है जो 2008-09 के 6.7 प्रतिशत के मुकाबले कहीं अधिक है। मंत्री ने कहा कि 9 से 10 प्रतिशत की वृद्धि दर के लक्ष्य का सपना हम लंबे समय से देख रहे हैं और अब यह हमारी पहुंच में है तथा हमें इसे प्राप्त करना है।

उल्लेखनीय है कि वैश्विक आर्थिक मंदी से पूर्व भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 9.0 प्रतिशत की दर थी लेकिन पिछले वित्त वर्ष 2008-09 में वितीय संकट के कारण यह 6.7 प्रतिशत रह गयी। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-अक्टूबर) में आर्थिक वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रही।

मंत्री ने कहा कि सरकार के समक्ष अल्पकालिक और मध्यकालिक चुनौती जरूरी चीजों की बढ़ती कीमत और बढ़ता राजकोषीय घाटा है।

खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर एक दशक के उच्चतम स्तर 20 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। साथ ही राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 6.8 प्रतिशत होने का अनुमान है जो राजकोषीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम में उल्लिखित लक्ष्य से कहीं अधिक है।

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि आर्थिक वृद्धि 9-10 प्रतिशत हासिल करने के लिए कृषि क्षेत्र में 4.0 प्रतिशत वृद्धि की जरूरत है।

देश के कई भागों में सूखा और बाढ़ के कारण कृषि और संबद्ध क्षेत्र की वृद्धि दर दूसरी तिमाही में 0.9 प्रतिशत रही जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 2.7 प्रतिशत थी।

वित्त मंत्री ने कहा कि अक्टूबर माह में औद्योगिक वृद्धि दर 10 प्रतिशत से अधिक रही है जो एक सकारात्मक संकेत है। वैश्विक आर्थिक संकट से निपटने के लिए दिये गये प्रोत्साहन पैकेज को वापस लिए जाने से जुड़े़ सवाल पर उन्होंने कहा, बजट (फरवरी) तक इंतजार कीजिए।

प्रत्यक्ष कर संहिता का जिक्र करते हुए मुखर्जी ने कहा कि नौ क्षेत्र चिंता के विषय हैं और मंत्रालय संहिता को अंतिम रूप देने से पहले उद्योग मंडलों समेत विभिन्न एजेंसियों से राय लेगा। यह संहिता आयकर कानून, 1961 का स्थान लेगा।

उन्होंने कहा कि कर संहिता आयकर कानून को सरल बनाएगा जिससे व्यक्तिगत आय करदाताओं और कंपनियों को फायदा होगा। उत्पाद एवं सेवा कर (जीएसटी) के बारे में मुखर्जी ने कहा कि योजना को लागू करने के मामले में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

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