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एरियर भुगतान का होगा परीक्षण

उत्तराखंड विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल में विधायक निधि, अनाथ बच्चों की सुरक्षा व योजना आयोग के शोध अधिकारी के उत्तराखंड के लिए आवंटन के मामलों पर सदन में विपक्ष ने शोरगुल किया। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने दो बार वैल में आकर विरोध जताया।

विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर के हस्तक्षेप और सरकार के मामलों पर परीक्षण के आश्वासन पर विपक्षी सदस्य  वापस सीटों पर बैठे।  बसपा सदस्य काजी निजामुद्दीन के नान प्लान  से संबंधित सवाल के जवाब में संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत कहा कि कर्मचारियों के एरियर व पेंशन का भुगतान समय से करने को सुनिश्चित किया गया है।

यदि किसी विभाग के कर्मचारी को छठे वेतनमान के एरियर का भुगतान नहीं हुआ तो उसका परीक्षण किया जाएगा। कांग्रेस के तिलक राज बेहड़ ने विधायक निधि की राशि जारी न किए जाने पर पूरक सवाल किया। इस पर सदन में विपक्षी सदस्यों ने शोरगुल किया। बसपा के निजामुद्दीन ने कांग्रेस के साथ सुर में सुर मिलाए। पंत ने कहा कि सभी जिलों को विधायक निधि जारी कर दी गई है।

बलिया नाले के निर्माण में धन हानि नहीं कांग्रेस के मनोज तिवारी ने सवाल पर सिंचाई मंत्री मातबर सिंह कंडारी ने कहा कि नैनीताल के बलिया नाले के निर्माण में सरकार को धनहानि नहीं हुई। आईआईटी रुड़की के परीक्षण व केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद ही इसका कार्य किया गया।

पहाड़ी जिलों में 194 परिवहन रूट घाटे में कांग्रेस की अमृता रावत के सवाल पर परिवहन मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने कहा कि पहाड़ी जिलों में कुल 254 मार्गो में निगम की बसें चलाई जा रही है। इनमें से 194 रूट घाटे में हैं। जबकि शहरी क्षेत्रों में 137 रूट लाभ और 60 हानि में हैं।

अनाथ बच्चों के संरक्षण को नियमावली निर्दलीय यशपाल बेनाम के सवाल पर समाज कल्याण मंत्री मातबर कंडारी ने बताया कि अनाथ बच्चों के भरण पोषण व शिक्षा के लिए पूर्व से ही कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बेनाम ने सवाल किया कि वर्ष 2000 में बनी राष्ट्रीय सुरक्षा व संरक्षण नीति के तहत राज्य की नियमावली बनी है।

जवाब न मिलने पर बेनाम व उनके सहयोग में किशोर उपाध्याय व काजी निजामुद्दीन वैल में आ गए। विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप पर मंत्री ने कहा कि इसकी नियमावली तैयार हो गई है।

आयोग में कार्यरत शोध अधिकारी का मामला बसपा के सुरेंद्र राकेश के योजना आयोग में कार्यरत शोध अधिकारी का उत्तराखंड के लिए आवंटन के सवाल पर भी विपक्ष ने वैल में आकर शोरगुल किया। संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि शोध अधिकारी का पुनर्गठन के माध्यम से उत्तराखंड के लिए आवंटन हुआ है। पर राकेश ने कहा कि आवंटन की वरिष्ठता सूची में किसी भी क्रम में उनका नाम नहीं है।

इस पर पंत ने कहा कि अंतिम सूची बाद में बनी। राकेश ने कहा कि एक ऐसे अधिकारी जिसने विभाग में कार्य नहीं किया, उनका सचिव समन्वय यूपी से 4 अगस्त, 01 को जारी विनियमितिकरण आदेश को उत्तराखंड नियोजन विभाग ने नियम विरुद्ध नहीं पाया था। आठ साल बाद वर्तमान सचिव नियोजन ने उसे मान्य कर दिया। इस सवाल पर मंत्री के जवाब से असंतुष्ट बसपा सदस्य राकेश वैल में आ गए। उनके समर्थन में कांग्रेस के सदस्य भी खड़े हो गए।

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