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नेपाल के राजनीतिक संकट के लिए भारत दोषीः प्रचंड

नेपाल के राजनीतिक संकट के लिए भारत दोषीः प्रचंड

नेपाल में अनिश्चितकालीन आम हड़ताल के जरिये देश में काम-काज और आम जनजीवन ठप करने की माओवादियों की धमकी के बीच माओवादियों के सुप्रीमो प्रचंड ने आरोप लगाया कि देश में मौजूदा संकट के लिये भारत की खुलेआम दखंलदाजी जिम्मेदार है। प्रचंड ने नेपाल में जारी राजनीतिक गतिरोध को 24 जनवरी तक हल करने के लिये 22 दलों के गठबंधन वाली माधव कुमार नेपाल नीत सरकार को एक अल्टीमेटम जारी करते हुए एक राष्ट्रीय सरकार के गठन की मांग की जिसमें माओवादियों को भी शामिल किया जाए।
    
वहीं, माओवादियों ने अपनी सरकार विरोधी बंद के जरिये पिछले तीन दिनों से देश में काम-काज और आम जनजीवन को ठप करने के बाद अगले महीने एक अनिश्चितकालीन आम हड़ताल शुरू करने की धमकी दी है।

प्रचंड ने भारत पर नेपाल के आंतरिक मामलों में खुलेआम हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए उसकी आलोचना की और कहा कि वह यहां की कठपुतली सरकार के साथ बातचीत करने के बजाय सिर्फ नई दिल्ली के साथ वार्ता करेंगे।

आंदोलनकारी माओवादी कार्यकर्ताओं ने राजधानी काठमांडो में मंगलवार को सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए मार्च किया। इस वजह से यहां बस और कार सड़कें से नदारद रही, प्रमुख कारोबारी परिसर और बाजार तथा शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। माओवादी प्रमुख ने राजधानी में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए मौजूदा गठबंधन सरकार को भंग करने और इसके स्थान पर एक राष्ट्रीय सरकार बनाने की मांग की। उन्होंने इस नयी सरकार में माओवादियों को भी शामिल करने की मांग की है। प्रचंड ने अपने हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि 24 जनवरी तक एक नयी राष्ट्रीय सरकार का गठन नहीं होने पर हम अनिश्चितकालीन हड़ताल करने के लिये मजबूर होंगे।

गौरतलब है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों का उददेश्य तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल रूकमंगद कटवाल को फिर से बहाल करने के राष्ट्रपति राम बरन यादव के असंवैधानिक फैसले में सुधार कराने को लेकर सरकार पर दबाव बनाना है। कटवाल को प्रचंड ने मई में पद से बर्खास्त कर दिया था। प्रचंड ने कहा है कि उनकी पार्टी देश के मौजूदा राजनीतिक संकट को हल करने के लिये यहां कठपुतली सरकार के बजाय आकाओं (भारत) के साथ निर्णायक वार्ता करने को तैयार है।

प्रचंड ने कहा कि नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल सहित अन्य राजनीतिक दलों के साथ वार्ता के जरिये मौजूदा राजनीतिक गतिरोध का हल निकलने की उन्हें उम्मीद नहीं है क्योंकि ये राजनीतिक दल भारत के निर्देशों के मुताबिक कार्य करते हैं। माओवादी नेता का आरोप है कि मौजूदा गठबंधन सरकार का गठन भारत की पहल पर किया गया और यह सरकार कठपुतली की तरह काम कर रही है।
    
माओवादी प्रमुख ने कहा कि पूर्व में हमने राजशाही के साथ वार्ता करनी चाही क्योंकि यह सभी राजनीतिक दलों का स्वामी था। उन्होंने कहा कि भारत अब इन राजनीतिक दलों का स्वामी बन गया है, इसलिये हम उसके साथ भी बातचीत करने को तैयार हैं। प्रचंड ने देश की राजनीतिक पार्टियों को रिमोट कंट्रोल से संचालित रोबोट करार दिया और आरोप लगाया कि उनके साथ बातचीत से कोई भी सकारात्मक नतीजा नहीं निकलेगा। उन्होंने नेपाल के आंतरिक मामलों में भारत पर दखलंदाजी करने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय संप्रभुता और अखंडता के लिये जंग जारी रखने का संकल्प लिया।

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