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महाकुंभ के लिए लगने लगे साधुओं के डेरे

गुणवत्ता की कमी एवं धीमी गति से चल रहे कार्यों की चौतरफा हो रही आलोचनाओं के बीच अखाड़ों के साधुओं के जत्थे अगले साल होने वाले कुम्भ मेले के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार में पहुंचने शुरु हो गए हैं।

 सर्वप्रथम जूना अखाड़े के रंमते पंच हरिद्वार पहुंच चुके हैं। रमते पंचो के जत्थे ने हरिद्वार के कनखल में डेरा जमा लिया है। अपने लाव लश्कर के साथ जूना अखाड़े के रमते पंचो ने वैदिक विधि विधान के साथ कनखल के पास भैरव मंदिर परिसर में अपना लंगर डाल दिया है।


 महाकुंभ में कुल 13 अखाड़े मेला प्रशासन की सूची में सूचीबद्ध है। इन्ही अखाडों को तमाम सुविधाओं के साथ हरकी पौड़ी में स्नान कराने का जिम्मा मेला प्रशासन के पास है। अत इन अखाडों के साधुओं के जत्थों के स्वागत के लिए मेला प्रशासन के अधिकारी भी उनके सत्कार में लगे रहे।


 सूत्रों के अनुसार कालान्तर से चली आ रही इस प्रथा में कुंभ में स्नान का प्रथम अधिकार भी इन्हीं तेरह अखाडों को हासिल है। यद्यपि हिन्दू धर्मावलम्बी शंकराचार्य को सर्वश्रेष्ठ मानते आए हैं। परन्तु कुंभ मेलों में केवल सूचीबद्ध तेरह अखाडों का ही अधिपत्य रहता है।


 मेले में आने वाले शकराचार्य व साधु संतों के लिए भी मेला प्रशासन द्वारा शंकराचार्य नगर, महामंडलेश्वर नगर, दक्षद्वीप बैरागी कैम्प को अस्थाई नगरों के रुप में विकसित किया है।


 इन अस्थाई नगरों में बिजली, पानी, सडकों का भी विकास एवं प्रबंध किया गया है। तम्बुओं में बसने वाले इन नगरों में कुंभ मेले के दौरान 24 घंटों धार्मिक गतिविधियां एवं रौनक मेला लगा रहेगा।


 तम्बुओं के इन नगरों में देश भर से आने वाले धार्मिक संत महात्मा अपने अनुयायियों के साथ करीब चार माह के लिए प्रवास करेंगे।
 
इन नगरों में इन दिनों धार्मिक प्रवचनों, कथाओं, पूजा अर्चना यज्ञ, भंडारों का बोलबाला रहेगा। साथ ही देश की धार्मिक गतिविधियों, भावी रणनीति पर भी मंथन होगा। गिरते सामाजिक एवं नैतिक पतन पर देश के धर्माचार्य चिन्तन करेंगे। इसके अलावा गौमुख से गंगा सागर तक मैली होती गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए गंभीर चिंतन एवं भविष्य की रणनीति भी बनाई जाएगी।

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  • Web Title:महाकुंभ के लिए लगने लगे साधुओं के डेरे