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हर पचास किलोमीटर पर होगा ट्रामा सेन्टर

केन्द्र सरकार की यह पहल अगर कारगर होती है तो एनएच पर दौड़ रही मौत की रफ्तार को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्रलय और एनएचआई ने हर पचास किलोमीटर पर मिनी ट्रामा सेन्टर खोलने की योजना तैयार की है।

इसमें एक डॉक्टर और एक प्रशिक्षित मेडिकल असिस्टेंट के साथ ही मोबाइल फोन और प्राथमिक उपचार की दवाएं होंगी। योजना में इसके लिए अपना भवन प्रस्तावित है, लेकिन जब तक इसकी व्यवस्था नहीं होती है तब तक यह किराये के मकान या एनएच के किनारे किसी स्कूल और अन्य सार्वजनिक भवनों में होंगे।

मेडिकल कॉलेज के सोशल प्रिवेंटिव मेडिसिन (एसपीएम) विभाग तथा स्वास्थ्य मंत्रलय की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हो चुका है कि एनएच पर होने वाली दुर्घटनाओं में मरने वालों में से अस्सी फीसदी लोगों की मौत ब्रेथ ब्रेकिंग के कारण होती है।

इन्हें प्राथमिक उपचार से बचाया जा सकता है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के प्रभारी डॉ. अजीत चौधरी ने कहा कि यहां पर सप्ताह में दो से तीन मरीज निश्चित तौर पर आते हैं। आमतौर पर दुर्घटना में सिर और छाती में चोट लगने के कारण सांस तथा खून का प्रवाह रूक जाता है।

इसे प्राथमिक उपचार कर शुरू किया जा सकता है। अगर शुरुआती पांच से दस मिनट में इस पर काबू कर लिया जाये तो मौत को रोका जा सकता है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस सेन्टर में मुख्य रूप से ब्रेथ ब्रेकिंग पर ही फोकस किया जा रहा है।

इसके लिए मंत्रलय ने सभी मंडलों के अपर निदेशकों को एनएचआई के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया है। एडी के अनुसार इस पर काम शुरू किया जा रहा है। फिलहाल हरिद्वार से लेकर मेरठ तक कहीं भी एक भी ट्रामा सेन्टर नहीं है।

मेडिकल कॉलेज में एक सेन्टर बन रहा है। लेकिन हर पचास किलोमीटर पर सेन्टर बनने से काफी हद तक सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या कम की जा सकती है।

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