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सीनियर्स की प्रेरणा से बनी ‘जलपरी’

सेक्टर-46 की दिव्या सतीजा अपने स्कूल में किसी स्टार से कम नहीं। आयशर स्कूल की नवीं कक्षा की इस छात्रा ने सीबीएसई नेशनल में रिकॉर्ड कायम किया। स्कूल के गेट पर उसका बड़ा फोटो उपलब्धि के साथ लगा है। पढ़ाई में भी दिव्या का रिकॉर्ड शानदार है। उसे स्कूल के साथी ‘जल परी’ कह कर पुकारते हैं।

दिव्या ने बताया कि तैराकी उसकी जान है। उसका लक्ष्य है अंतरराष्ट्रीय तैराक बनना और भारत को ओलंपिक में मेडल दिलाना। वह अपने पापा वेद प्रकाश सतीजा के साथ स्वीमिंग सीखने जाती थी। 2005 में स्कूल में ही उसने प्रोफेशनल तैराकी सीखना शुरू किया। पहले ही साल जिला तैराकी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। सीनियर्स ने कहा कि दिव्या बेहतर कर सकती है। इसी से दिव्या को प्रेरणा मिली, जो अब तक जोश बनकर दौड़ रही है। सीबीएसई नेशनल में कई मेडल उसके नाम हैं।

दिव्या अब तक जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 107 मेडल जीत चुकी है। इसमें 66 गोल्ड मेडल शामिल हैं। 2009 में सीबीएसई नेशनल तैराकी प्रतियोगिता के 50 मीटर फ्री स्टाइल इवेंट को 33.06 सेकेंड में पूरा कर दिल्ली की भावना शैकीन के 34.12 सैकेंड के रिकॉर्ड को भी तोड़ा।

दिव्या ने बताया कि तैराकी के साथ-साथ पढ़ाई को भी पूरा वक्त देती हैं। यही वजह है कि वह हर कक्षा में 80 फीसदी से अधिक अंक लाती है। वेस्टर्न डांस उसका शौक है। ओलंपिक में रिकॉर्ड मेडल जीतने वाले अमेरिका के तैराक फ्लेप्स उसका आदर्श हैं।

 

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  • Web Title:बहुमुखी प्रतिभा की धनी है नन्हीं ‘जलपरी’