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अलग गोरखालैंड राज्य के मुद्दे पर त्रिपक्षीय वार्ता विफल

अलग गोरखालैंड राज्य के मुद्दे पर त्रिपक्षीय वार्ता विफल

गोरखालैंड मुद्दे पर जीजेएम के साथ हुई त्रिपक्षीय वार्ता का चौथा दौर सोमवार को विफल हो गया। इस दौरान जीजेएम ने इस मामले में राजनैतिक वार्ता पर जोर दिया।

त्रिपक्षीय वार्ता में पांच सदस्यीय केंद्रीय दल का नेतृत्व करने वाले केंद्रीय गृह सचिव जी के पिल्लई ने कहा कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने 45 दिनों के भीतर अगले दौर की वार्ता के तहत राजनैतिक स्तर पर बातचीत कराने को कहा है।

पश्चिम बंगाल से काटकर अलग गोरखालैंड राज्य बनाने की जीजेएम की मांग पर करीब तीन घंटे तक चली बैठक के बाद उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सहमति का कोई सवाल नहीं है। गोरखालैंड राज्य के गठन को लेकर फिलहाल आम सहमति नहीं है।

पिल्लै ने कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार अपनी राय देगी और उसके बाद हम उस अवधि के भीतर जीजेएम के पास आएंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या वार्ता में केंद्र की ओर से कोई प्रस्ताव पेश किया गया, के जवाब में उन्होंने इस बात से इंकार किया। उन्होंने कहा कि यह राज्य सरकार और जीजेएम के साथ विचार-विमर्श के बाद किया जाएगा।

    यह पूछे जाने पर कि क्या वर्ष 1988 में गठित दार्जिलिंग गोरखा हिल काउन्सिल काम करना जारी रखेगी तो पिल्लई ने कहा कि अगर उसे खत्म नहीं किया जाता तो यह काम करना जारी रखेगी। दिल्ली में गत 11 अगस्त को हुई त्रिपक्षीय वार्ता में डीजीएचसी को खत्म करने और दार्जिलिंग में वैकल्पिक ढांचे पर काम करने पर सहमति बनी थी।

जहां पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के बंटवारे से इंकार किया है, वहीं केंद्र ने रविवार को चेतावनी दी कि अगर जीजेएम नेतत्व अपनी मांगों पर अड़ा रहा तो हालात गंभीर हो सकते हैं।

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