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अजब पंचायत सेवकों की गजब कहानी

पद, पैसा और प्रमोशन का सपना कौन नहीं पालता? मगर पंचायती राज व्यवस्था की अहम कड़ी पंचायत सेवक यानी ग्राम पंचायत अधिकारियों के साथ ऐसा नहीं है। सरकार इनको प्रोन्नति देकर एडीओ बनाना चाहती है और इनमें से अधिकांश इसके लिए तैयार नहीं होते। इसी चक्कर में अधिकतर जिलों में एडीओ पंचायत के पद खाली हैं।

गाजियाबाद में आठ ब्लाक हैं तो यहां बीडीओ और एडीओ के आठ-आठ पद सृजित हैं। जानकर हैरत होगी कि लंबे समय से जिले में एडीओ पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए प्रशासन को अधिकारी नहीं मिल रहे। एडीओ पंचायत स्तर के अधिकारी अपने ब्लाक क्षेत्र होने वाले विकास कार्यों की निगरानी का काम संभालते हैं।

अफसरों की कमी की वजह से विकास कार्यों की हकीकत जांचने और समझने का काम सही नहीं हो पा रहा।गांव-गांव तैनात पंचायत सेवकों को वरिष्ठता के आधार पर एडीओ बनने का समय-समय पर मौका नसीब होता है।

प्रमोशन से उनका पद और रुतबा तो बढ़ जाता है, मगर पैसे में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होती। बल्कि प्रमोशन होते ही उनको गैर जनपद तबादले पर भी जाना पड़ता है। यही वजह है कि ग्राम सेवक पूरे सर्विस काल में एडीओ बनने के बजाय मूल पद पर बने रहना पसंद करते हैं।

जिला पंचायत राज अधिकारी वीरेन्द्र सिंह बताते हैं कि प्रमोशन के वक्त ग्राम सेवकों से उनकी राय पूछी जाती है। तब अधिकांश कर्मचारी प्रमोशन नहीं लेने की बात लिखकर देते हैं। प्रदेश में एडीओ अफसरों की कमी को देखते हुए शासन अब कड़े फैसले ले रहा है।

कमी को पूरा करने के लिए प्रमोशन भी किए जा रहे हैं और प्रोन्नत अधिकारियों को तुरंत संबंधित जगहों पर जाकर ज्वाइन करने के आदेश भी दिए हैं। हालांकि इसके बाद भी एडीओ के पद खाली चल रहे हैं।

 

 

 

 

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