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सहवाग पर कप्तानी का कोई दबाव नहीं: कोच

सहवाग पर कप्तानी का कोई दबाव नहीं: कोच

दिल्ली के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के कोच एएन शर्मा का मानना है कि श्रीलंका के खिलाफ अगले दो मैचों में कप्तानी की जिम्मेदारी से उनके शिष्य पर कोई दबाव नहीं होगा और वह दिग्गज खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में टीम को जीत दिलाकर सीरीज में बढ़त दिलाएंगे।

नियमित कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर धीमी ओवर रेट के कारण लगे दो मैचों के प्रतिबंध के कारण श्रीलंका के खिलाफ 21 दिसंबर को कटक और 24 दिसंबर को कोलकाता में मुकाबले के लिए सहवाग को कप्तानी सौंपी गई है। अभी दोनों टीमें 1-1 से बराबरी पर हैं और युवराज सिंह का ऊंगुली की चोट के कारण अगले मैच में खेलना संदिग्ध है।
    
सहवाग ने अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान लगाने के लिए आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स की कप्तानी भी छोड़ दी थी। शर्मा ने कहा कि वह पहले भी कप्तानी कर चुका है और कप्तान की जिम्मेदारी से वाकिफ है। उसने रणजी ट्रॉफी में अपनी कप्तानी में दिल्ली को जीत दिलाई है।
 
यह पूछे जाने पर धोनी और युवराज की अनुपस्थिति में सहवाग के कंधों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाएगी तो शर्मा ने कहा कि वह पहले भी टीम इंडिया के लिए यह जिम्मेदारी संभाल चुका है। आप तो जानते हैं कि वह किसी भी तरह का दबाव नहीं लेता और मुझे उम्मीद है कि वह सीरीज में भारत को निर्णायक बढ़त दिलाएगा।

सहवाग ने श्रीलंका के खिलाफ पहले वनडे में 102 गेंदों पर 146 रनों की विस्फोटक पारी खेली थी, जिसमें भारत ने तीन रन से जीत दर्ज की थी। हालांकि उनके कोच सहवाग की तुलना किसी अन्य बल्लेबाज से किए जाने से खुश नहीं होते। शर्मा ने कहा कि हाल में किसी ने उसकी तुलना विवियन रिचर्ड्स से की। मुझे यह अच्छा नहीं लगता। हर खिलाड़ी का एक स्टाइल होता है और वह उसी के अनुसार खेलता है। विव रिचर्ड्स की अलग क्लास थी जबकि सहवाग आक्रामक खेलता है।

सहवाग ने अभी तक पांच वनडे में भारतीय टीम की अगुवाई की है, जिसमें टीम को दो में जीत जबकि तीन में हार का मुंह देखना पड़ा। उन्होंने 2006 में तीन दिसंबर को सेंचुरियन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीम की कमान संभाली थी, जिसमें भारत को नौ विकेट से हार का मुंह देखना पड़ा था।

शर्मा ने कहा कि जीत या हार के लिए पूरी टीम जिम्मेदार होती है। पिछले मैच में हार के लिए आप कप्तान धोनी को दोषी नहीं मान सकते। यह टीम प्रयास होता है। वह हालांकि धोनी के तीन ओवरों के देरी से डाले जाने के लिए इतने कड़े प्रतिबंध से काफी खफा हैं। उन्होंने कहा कि धोनी पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध लगा। आईसीसी को कम से कम सभी हालातों और इन ओवरों के अंदर कितने रन बने इन सब बातों को ध्यान में रखकर प्रतिबंध लगाना चाहिए। मेरे हिसाब से आईसीसी के सभी नियम बल्लेबाजों के लिए बने हैं, गेंदबाजों के लिए कोई नियम नहीं है।

दिल्ली के अन्य खिलाड़ी ईशांत शर्मा के टीम में चुने के बारे में उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि उसे थोड़ा और आराम देना चाहिए था, क्योंकि इससे खिलाड़ी में अच्छा करने का आता भरता है। जब गेंदबाज फॉर्म में नहीं हो तो थोड़ा आराम बेहतर होता है, जिससे वह अपनी गलतियों को ठीक कर सके।

इरफान पठान की वापसी के बारे में उन्होंने कहा कि वह रणजी में अच्छा कर रहा है। उसे निश्चित रूप से वापस लाना चाहिए। लेकिन मुझे लगता है कि जरूरत से ज्यादा कोचिंग भी खिलाड़ी को बेकार कर देती है। वह शुरू में जितनी अच्छी गेंदबाजी करता था, वैसी अब नहीं करता।
 
उनके मुताबिक भारतीय टीम की गेंदबाजी भी अच्छी नहीं रही। जहीर खान भी लगातार अच्छा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में फील्डिंग की कमियों में भी काफी सुधार की दरकार है।

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