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सप्ताह के व्रत-त्योहार (20 से 26 दिसम्बर)

20 दिसम्बर (रविवार) को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत। ब्रह्मावर्त (बिटूर)में सिद्ध गणेश मन्दिर में अभिषेक।
वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत : यह व्रत अभीष्ट फलों को देने वाला है। कामना भेद से अलग-अलग चीजों से गणेशजी की मूर्ति बनाकर पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति: प्रचोदयात। इस गणेश गायत्री मंत्र से जाप करना चाहिए। इससे सभी कार्य सिद्ध होते हैं।
21 दिसम्बर (सोमवार) को पंचक प्रारम्भ सायं 5 बजकर 2 मिनट से। सोमवती पंचमी पर्व। सूर्य सायन मकर राशि में रात्रि 10 बजकर 3 मिनट पर।
पंचमी : यह तिथि नागों को अत्यंत प्रिय है। इस दिन नागों को दूध (गाय) से स्नान कराते हैं। इससे सर्प भय नहीं रहता।
22 दिसम्बर (मंगलवार) को पंचक चालू है। राष्ट्रीय पौष मासारम्भ। अयन करि दिन। उत्तरायण दिवस।
23 दिसम्बर (बुधवार) को पंचक चालू हैं। सतगुरु श्री गोविन्द सिंह महाराज का प्रकाशोत्सव प्रारम्भ। त्र्यह स्पर्श तिथि वृद्धि।
24 दिसम्बर (वृहस्पतिवार) को पंचक चालू हैं। सतगुरु श्री गोविन्द सिंह जयंती।
25 दिसम्बर (शुक्रवार) को पंचक चालू हैं। श्री दुर्गाष्टमी व्रत। श्री अन्नपूर्णाष्टमी व्रत। शाकम्भरी यात्रा। शाकम्भरी देवी नवरात्ररम्भ। क्रिसमिस डे (बड़ा दिन) साधु टी.एल. वासवानी का जन्म दिवस (सिन्धी)।
श्री दुर्गाष्टमी व्रत : यह व्रत सम्पूर्ण पापों का प्रशमन तथा उपद्रवों का नाश करने वाला है।
26 दिसम्बर (शनिवार) को पंचक समाप्त मध्याह्न् 2 बजकर 56 मिनट पर। जोरमेला - 3 दिन (पंजाब)।

 

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