class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सौदागर के सपने का टूटना

हमारा बजाज! रेडियो विज्ञापन की कभी यह एक ऐसी ट्यून थी कि सुनने वाले देश के हर आम और खास आदमी का दिल धड़कने लगता था। बजाज स्कूटर राहुल बजाज की ऐसी परिकल्पना थी कि सब उसे अपने आंगन में खड़ा देखना चाहते थे। इस स्कूटर ने कितनों की शादी करा दी और कितनों की शादी तुड़वा दी। दहेज में बजाज स्कूटर न मिले तो लड़के का रूठ जाना पक्का होता था। यही वजह है कि 1980 में बजाज आटो कंपनी का चेतक ब्रांड स्कूटर की वेटिंग लिस्ट 13 साल थी। जिस का नम्बर लग जाता उसकी लाटरी खुल जाती थी। अब इसी बजाज स्कूटर के उत्पादन पर रोक लगाने की योजना है। इस खबर से जितनी परेशानी स्कूटर प्रेमियों को हुई है, उससे कम इस स्कूटर के प्रणेता राहुल बजाज का भी हुई है। घराने का घमासान है यह या फिर इसे दो पीढ़ियों की सोच का अंतर कह सकते हैं। इन दोनों में से बजाज स्कूटर किसकी बलि चढ़ रहा है इसे समझना मुश्किल है। राहुल बजाज के बेट राजीव बजाज के लिये मुनाफा सबसे बड़ा सच है। वे स्कूटर का उत्पादन बंद कर अपनी सारी ताकत मोटिरसाइकिल के उत्पादन में लगा कर कंपनी को विश्व की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल कंपनी बनाना चाहते हैं। इस बाबत राजीव बजाज का कहना है कि वे भावनाओं पर आधारित फैसले को कम तवज्जो देते हैं और उनका तर्क पर ज्यादा भरोसा है। वहीं पिता राहुल बजाज बेटे के फैसले से आहत हैं और दुखी मन से कहते हैं कि मुझे बुरा लग रहा है। मुझे इस फैसले से चोट पहुंची है। राहुल बजाज को चोट पहुंचना लाजमी है। उन्होंने लाइसेंस परमिट राज में 1965 में इस बजाज ग्रुप की कमान संभाली थी। अपने अथक प्रयास और परिश्रम से उन्होंने बजाज आटो को 72 मिलियन से 46.16 बिलियन की कंपनी बना दिया था। देश में 1980 में बजाज आटो देश की शीर्षस्थ स्कूटर बनाने वाली कंपनी बन गई थी। बजाज ग्रुप आज देश के दस बड़े व्यापारिक घरानों में शुमार किया जाता है। 10 जून 1938 में जन्मे राहुल बजाज ने दिल्ली के सेंट स्टीफेन्स कालेज, गवर्मेंट ला कालेज और हारवर्ड बिजनेस स्कूल से पढ़ाई की है। उनके दो बेटे राजीव और संजीव और एक बेटी सुनयना केजरीवाल है। उन्होंने बजाज ग्रुप को अपने दादा और ग्रुप के संस्थापक जमनालाल बजाज के मूल्यों पर चलाया। राहुल बजाज के उद्योग जगत में योगदान के लिये उन्हें भारत सरकार ने 2001 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। 2001 में स्टाक मार्केट के ध्वस्त होने और होंडा के भारत आने के बाद कहा जाने लगा था कि अब बजाज आटो के दिन बहुत थोड़े हैं। ऐसे में राहुल बजाज डिगे नहीं। उन्होंने उदारवाद का विरोध किया और होंडा मोटरसाइकिल से भिड़ने की रणनीति बनाई। उन्होंने एक वर्ल्ड क्लास फैक्ट्री लगाई और बजाज पल्सर का निर्माण शुरू किया। आज बजाज पल्सर अपने सेगमेंट में चेतक स्कूटर की तरह ही लीडर है। फिलवक्त राहुल बजाज राज्य सभा के सदस्य हैं। उनका कार्यकाल 4 जुलाई 2010 में खत्म हो रहा है।      

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सौदागर के सपने का टूटना