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एक छलाँग अनंत में

एक छलाँग अनंत में

पता नहीं आप अखबार पढ़ते समय ऐसा सोचते हैं या नहीं पर अपने न्यूज रूम में हमलोग अक्सर खुद को छटपटाता पाते हैं कि जो सामग्री देना चाहते थे, वह नहीं दे पाए। वजह साफ है पृष्ठों की सीमा। आज हम इस बंधन से मुक्त होने जा रहे हैं। बस www.livehindustan.com टाइप कीजिए और हमारे साथ जानकारियों के अनंत संसार में गोते लगाइए।

एक मार्च 2004 को जब हमने www.hindustandainik.com लांच किया था तो वह एक उन्न्तशील सोच के अखबार की मॉडर्न रीति-नीति के साथ जुगलबंदी की कोशिश थी। तब से काफी वक्त बीत गया। तकनीक कहाँ से कहाँ पहुँच गई और इसी के साथ लोगों के जानने-बूझने की भूख ने भी सारे कीर्तिमान तोड़ दिए। 

इसीलिए हम लेकर आए www.livehindustan.com। इसमें थोड़ा रंग रूप बदला। बहुत सी नई तकनीक का इस्तेमाल किया और बहुत विविध कंटेंट आप तक पहुँचाने की कोशिश शुरू की। परिणाम उम्मीद से बहुत बेहतर हैं। हमारी हिट्स कई गुना बढ़ गईं हैं। www.livehindustan.com पर आने वाले विजिटर देश और काल की सीमाओं से परे हैं। हमारे प्रति आपका यह विश्वास हममें कुछ और करने की ललक पैदा करता है। तो पेश हैं-ब्लॉग्स।

इसमें फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ के वरिष्ठ सम्पादकों के ब्लॉग शामिल किए गए हैं। हम महसूस करते थे कि हम जो लेख लिखते हैं अक्सर उनका दायरा, विषयवस्तु तक सीमित होता है पर लेखन की इस नवीनतम विधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह उन्मुक्त है और सहज तौर पर कई लोगों के आपसी विचार विनिमय का जरिया बन जाती है। हमें भरोसा है कि इससे हम आपके दिलो-दिमाग के कुछ और करीब हो सकेंगे।

हजारों साल पहले जब वेदव्यास और वाल्मीकि ने अपने महाकाव्यों की रचना की थी तो वे इसलिए लोकप्रिय हो सके क्योंकि उन्हें गाया जा सकता था। पीढ़ी दर पीढ़ी दर लोग इन्हें गाते गए। उन्हें महसूस करते गए और उनमें कुछ न कुछ जोड़ते भी गए। हमारे ‘महाभारत’ और ‘रामायण’ चारण परम्परा के ऐसे महाकाव्य हैं, जिन्हें राजाओं और उन पर आश्रित रहने वाले चारणों ने नस्ल दर नस्ल कहा और सुना। पर ब्लॉग ने समय और भूगोल की दूरियों-दुरूहताओं को खत्म कर दिया है। हम चाहे लास वेगास में बैठे हों या बेगूसराय में, नेट लगभग मन की गति से हमें जोड़ता है।

आज जब तरह-तरह से दुनिया को तोड़ने की कोशिशें की जा रहीं हैं तो अकेला विचार है जो समूची धरती के बाशिंदों को एकजुट रख सकता है। हमारी कोशिश होगी कि हम रचनात्मक विचारों का ऐसा नन्दनकानन रचें जो मानवता को बंधन मुक्त करने में अपना विनम्र योगदान दे सके।

और हाँ, ब्लॉग सिर्फ शुरुआत है। अभी आपको www.livehindustan.com पर बहुत से नए और उपयोगी फीचर देखने को मिलेंगे। देर मत कीजिए www.livehindustan.com पर जाइए और हमारे साथ विचारों और जानकारियों के अनंत में सफर पर निकल पड़िए। सिर्फ पढ़िए मत। हमें लिखिए भी ताकि हम रचनात्मकता के नए आयाम मिल-जुल कर गढ़ सकें।

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