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फाइनेंस के ऑनलाइन टूल

सही फंड ट्रेक करने और बेहतर स्टॉक चुनने के लिए हम गहन रिसर्च और कड़ी मशक्कत करते हैं। होम लोन लेने के दौरान कम ब्याज दर की मालुमात करने के लिए विभिन्न बैंकों की वेबसाइट चेक करते हैं। यही नहीं, स्टॉक और फंड की बेहतर च्वॉइस के लिए सलाहकार से सलाह लेते हैं। हालांकि 10 से 15 साल के बाद जब रिटर्न मिलने की नौबत आती है तब मालूम चलता है कि उसकी वैल्युएशन कम हो चुकी है।

मोटे तौर पर कहा जाए तो कई बार ऐसा देखने में आता है कि आपने लक्ष्य बनाकर जो निवेश किया था उसका माकूल परिणाम सामने नहीं आ पाया। जब आप अपनी पुरानी डायरियों को पलटते हैं और सही जवाब पता करने के लिए अपनी एक्सल सीट को चेक करते हैं तब आप देखते हैं कि कई चीजें गुम हो चुकी हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि इतनी जी-तोड़ मेहनत करने के बावजूद बेहतर परिणाम सामने क्यों नहीं आ पाते। आखिर गलत होता कहां है? ऐसे में सारी समस्याओं का हल एक ही दिखता है और वो है, अपने निवेश पर लगातार निगाह रखें।

ऑनलाइन टूल क्यों
बाजार में आपके पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने के लिए रोजाना नए विकल्प आते रहते हैं जिसकी वजह से इन्हें मैनेज करना काफी मुश्किल काम होता है। जरूरत से ज्यादा बिल और इंश्योरेंस की अधिकता की वजह से कई बार डिफॉल्ट की स्थिति हो जाती है। फाइनेंस पर लगातार निगाह बनाए रखने के लिहाज से ये जरूरी है कि आप तमाम लॉग इन आईडी, पासवर्ड और पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर को ध्यान रखें। इसके अलावा, म्यूचुअल फंड की नेट असेट वैल्यू को ट्रेक करना और स्टॉक कीमतों को मॉनिटर भी करना होता है।

सो, ऐसे में इससे बाहर निकलने का तरीका क्या है? इसका प्रभावशाली तरीका ये है कि आप ऑनलाइन फाइनेंशियल टूल का प्रयोग करें जो आपको पैसे को मैनेज करने में मददगार साबित होगा। इसके अलावा, ये आपको अन्य फीचरों के अलावा फाइनेंशियल प्लानिंग सर्विस की भी सुविधा प्रदान करेगा। आप इसको अपने समस्त निवेशों की एक जगह के तौर पर देख सकते हैं। हालांकि कुछ बैंक ये सुविधा प्रदान करते हैं। तो ऑनलाइन फाइनेंशियल टूल आपके लिए कारगर है। मनी मेटर के प्रमुख (बिजनेस), देवेन शाह, जिनकी कंपनी फाइनेंशियल कंपनियों के लिए इंफॉर्मेशन और सॉफ्टवेयर टूल बनाती है। मौजूदा दौर में इंडीविजुअल के पास कई बैंक अकाउंट और क्रेडिट कार्ड होते हैं। साथ ही म्यूचुअल फंड और स्टॉक में कई तरीकों का निवेश होता है। परंपरागत तरीके से इन पर नजर रखना मुश्किल काम होता है।

ये हैं फायदे
पर्सनल फाइनेंस टूल तीन बुनियादी सेवाएं ऑफर करता है।

अकाउंट एग्रीगेशन : इस सुविधा के द्वारा आप बैंक, क्रेडिट कार्ड, इंश्योरेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और पब्लिक प्रॉविडेंड को एक ही जगह पर देख सकते हैं। इससे आप विभिन्न पासवर्ड और लॉगइन आईडी को याद रखने की मुश्किल से बच जाते हैं। इसके लिए आपको इन सभी अकाउंट से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डाटा आयात करना होगा। आपका जहां-जहां ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन है वहां से आप स्टेटमेंट फारवर्ड कर सकते हैं। अन्य विकल्प ये हैं कि आप जानकारी के लिए ऑटोमेटिक टूल का प्रयोग करें जिससे संबंधित इंस्टीट्यूट आपको जानकारियां भेजते रहेंगे। आपके पास अंतिम विकल्प ये है कि आप नंबर को मैनुअल तरीके से फीड करें जैसा कि आप एक्सल में करते हैं। इसके अलावा, आप शेष सिस्टम को इसकी देखभाल के लिए छोड़ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर आपको अगर विभिन्न लोन की जानकारी को अपडेट करना है तो सिस्टम आपके नाम से कुल ऋण को जांचेगा।

निवेश पर निगाह : आप अपने पूरे पोर्टफोलियो पर इस सुविधा के मार्फत निगाह रख सकते हैं। इससे आप रियल टाइम पर अपने स्टॉक, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश पर निगाह रख सकेंगे। ज्यादातर वेबसाइट मुफ्त में मुहैया कराती हैं। बस आपको निवेश की कुछ बुनियादी जानकारियां बतानी होंगी। जैसे कि किस तारीख को आपने खरीदा या बेचा, कॉस्ट प्राइस और यूनिट की संख्या। इस जानकारी के आधार पर वेबसाइट आपके आयकर और कैपिटल गेन टैक्स को कंप्यूट करेगी। आपके पोर्टफोलियो की लेटेस्ट वैल्यू के आधार पर वेबसाइट आपके ई-मेल पर लगातार जानकारी भेजती रहेगी। आप असेट लोकेशन चार्ट प्राप्त कर सकते हैं और विभिन्न कंपनियों, इंडस्ट्री और सेक्टर में अपना अपडेट मिलता रहेगा।

बजट और अलर्ट : सॉफ्टवेयर की मदद से आप अपनी आय और खर्च का विश्लेषण कर पाएंगे और अपने खर्च के पैटर्न को समझ पाएंगे। यह आपको बजटिंग टूल भी मुहैया कराएगा यह आपको हर समय पर ये जानकारी देता रहेगा कि अब अमुक मद पर आपका बजट ज्यादा हो चुका है। इसके अलावा, आपके बिल और प्रीमियम के बिल की आने वाली तारीखों का रिमांइडर भी आपको मिलता रहेगा। ज्यादातर साइट फाइनेंशियल प्लानिंग के टिप्स देती हैं।

कितनी लागत
ज्यादातर फाइनेंशियल टूल मुफ्त में उपलब्ध होते हैं, लेकिन कुछ वेबसाइट इन टूल के कुछ पैसा लेती हैं।

ध्यान रखें
जब आप साइट में एनरोल करेंगे तब आपके लिए सावधान रहने की जरूरत है। यह न भूलें कि जब आप संवेदनशील वित्तीय जानकारियों को शेयर करते हैं तब उसमें एक जोखिम होता है। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि जिस वेबसाइट का आप प्रयोग करते हैं उसके सर्वर पर जानकारियां एकत्रित न करें बल्कि अपने मॉनीटर पर स्टोर करें और वह भी इनक्रिप्ट फॉर्मेट में। डेस्कटॉप में डाटा को डाउनलोड करने का मतलब ये है कि आप डाटा को तभी देख सकेंगे, जब आप इंटरनेट कनेक्ट करेंगे। डाटा के मामले में किसी पर विश्वास करना सही नहीं है। ध्यान रखें कि ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है।

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