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मच्छरों के आगे सुरक्षाबल पस्त

खूंखार नक्सलियों की (मांद) में घुसकर उनसे सफलतापूर्वक लोहा ले रहे सुरक्षाबलों को आजकल माओवाद प्रभावित झारखंड के मच्छरों ने पस्त कर दिया है।
 
दरअसल राज्य में 25 नवंबर से चरणबद्ध तरीके से हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए नक्सली क्षेत्रों में स्थानीय पुलिस के अलावा बडी संख्या में अर्धसैनिक बलों तथा अन्य राज्यों से आए सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। जिसकी वजह से चुनाव के दौरान नक्सली हिंसा पर लगभग पूरी तरह लगाम लगा है लेकिन जंगलों से भरे इन क्षेत्रों में मच्छर जनित मलेरिया की चपेट में आकर तीन जवानों की मौत चुकी है तथा कई बीमार हो गए हैं।
 नक्सली क्षेत्र में तैनात गुजरात स्टेट रिजर्व पुलिस के एक जवान की राजधानी रांची के अपोलो अस्पताल में कल मलेरिया से मौत हो गई जबकि गत 14 दिसंबर को झारखंड पुलिस के एक जवान ने दम तोड़ दिया था। इससे पूर्व चुनावी डूटी में तैनात नगालैंड पुलिस के एक जवान की भी मलेरिया के कारण मौत हो गई थी। अब भी मच्छरों के प्रकोप से नक्सल क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाबल के कई जवान मलेरिया की चपेट में हैं। इससे निपटने के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने विशेष उपाय किए हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि झारखंड के कई इलाके जिनमें अधिकांश नक्सल प्रभावित क्षेत्र शामिल हैं मलेरिया के खतरे वाले जोन के रूप में पहले से ही चिन्हित हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले इन क्षेत्रों से उनको खदेड़ कर अब तक शांतिपूर्वक चुनाव कराने में सफल रहे सुरक्षाबलों के मलेरिया की चपेट में आकर मरने से उनके मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। हालांकि सरकार इससे निपटने के लिए हरसंभव उपाय कर रही है ताकि अंतिम चरण के मतदान के बाद भी इन क्षेत्रों में तैनात जवानों को इससे बचाया जा सके।
 
ज्ञातव्य है कि झारखंड के 24 में से 18 जिले आधिकारिक रूप से नक्सल प्रभावित घोषित हैं। बिहार से अलग होकर वर्ष 2000 में नया राज्य बने झारखंड में पिछले नौ वर्ष के दौरान लगभग डेढ़ हजार लोगों की
नक्सली हिंसा में मौत हो चुकी है, जिसमें बडी संख्या में सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।

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