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दो टूक (18 दिसंबर, 2009)

दिल्ली के दो अतिव्यस्त और अस्त-व्यस्त रेलवे स्टेशनों के लिए राहत की बात है कि उनका बोझ घटाने के लिए एक नया साथी तैयार है। आनंद विहार रेलवे टर्मिनल की शुरुआत का संकेत भी चेहरे खिलाने वाला है। दिल्ली महज एक शहर नहीं बल्कि हम सब की जरूरत है।

करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी और उम्मीदों को थामे इस शहर को ट्रेफिक के जाम, तारों के मकड़जाल या हवा में घुली घुटन से राहत देने वाली जरा सी बात भी हमें अपनी निजी खुशी का अहसास कराती है। दिल्ली की दौड़ हम सबकी जिंदगी का हिस्सा है और दहलीज पर रेलवे की नई दस्तक बता रही है कि दिल्ली अब किसी के लिए दूर नहीं।

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