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जरदारी को झटका, फिर खुलेंगे भ्रष्टाचार के मामले

जरदारी को झटका, फिर खुलेंगे भ्रष्टाचार के मामले

पाकिस्तान में राजनीतिक संकट उत्पन्न के हालात बुधवार रात तब पैदा होते नजर आये जब राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के राष्ट्राध्यक्ष पद पर बने रहने को लेकर अनिश्चितता छा गये क्योंकि शीर्ष अदालत ने भ्रष्टाचार के मामलों में उन्हें राहत देने वाले अध्यादेश को रद्द कर दिया। इस अध्यादेश के तहत जरदारी सहित कई प्रमुख राजनेताओं को भ्रष्टाचार मामलों में अभियोग से छूट मिली हुई थी।
   
शीर्ष अदालत ने प्रशासन को भ्रष्टाचार के मामलों को दोबारा खोलने के भी आदेश दिये हैं। जरदारी को मिले झटके के तहत देश की शीर्ष अदालत ने घोषणा की कि माफी संबंधी वह विवादास्पद अध्यादेश अवैध है, जिसके तहत राष्ट्रपति को भ्रष्टाचार के मामलों से प्रतिरोध मिला हुआ है। यह अदालत का एक ऐसा फैसला है जिससे जरदारी के शासन को चुनौती मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।

राष्ट्रीय पुनर्मेलमिलाप अध्यादेश (एनआरओ) को निरस्त करते हुए अदालत ने अपने फैसले के जरिये जरदारी के प्रति निष्ठा रखने वाले कैबिनेट के मंत्रियों और हजारों अन्य अधिकारियों के समक्ष भ्रष्टाचार और अन्य आपराधिक मामले दोबारा शुरू होने का खतरा जाहिरा तौर पर उत्पन्न कर दिया है।

अदालत ने कहा कि एनआरओ के तहत भ्रष्टाचार के सभी मामलों की समीक्षा की जायेगी। इस अध्यादेश के तहत जारी सभी आदेश तथा दोषमुक्तियां वैध नहीं हैं। चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी की अध्यक्षता वाली 17 न्यायाधीशों की पीठ ने अध्यादेश को एकदम शुरू से ही असंवैधानिक बताया। अदालत में मौजूद राष्ट्रपति के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर ने कहा कि इस फैसले से जरदारी के समक्ष कोई खतरा पैदा नहीं होता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी अदालतों और अदालती फैसलों का सम्मान करती है। इस फैसले से पाकिस्तान के राष्ट्रपति पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

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