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भटवाड़ी क्षेत्र में बंदरों का आतंक

भटवाड़ी मुख्यालय समेत आस-पास के गांव में बंदरों के आतंक से ग्रामीण खासे भयभीत हैं। बंदर दिन दहाड़े घरों में घुस कर साग-सब्जी व खाद्य सामग्री को उठा कर ले जा रहे हैं। सूखे की मार जंगलों पर भी भारी पड़ रही है। जंगलों में लगने वाले कंदमूल फल का उत्पादन घटने से बंदर, लंगूर, सुअर व भालू गांव की ओर आ रहे हैं।

भटवाड़ी गांव, रैथल, बासरू, नटीण, गोरशाली, जखोल, स्याबा, पिलंग, सौरा आदि गांव में इन दिनों बंदरों व लंगूरों का आतंक मचा रखा है। जंगलों से भाग कर गांव की और पहुंच रहे बंदर घर में रखे कद्दू, लोंकी, ककड़ी, आलू आदि पर सब्ज्यो पर हाथ साफ कर रहे हैं।

भटवाड़ा ख्यालय में तो बंदरों ने घरों में घुस कर चावल, आटा, रोटी, व अन्य खाद्य सामग्री पर हाथ साफ किया जा रहा है। गांव के निकट गंगा नदी व जंगल होने पर बंदर दिन दहाड़ घरों में घुस रहे हैं। कई घरों से तो बंदरों ने बर्तन तक उठा दिए।

क्षेत्र के पूर्व प्रधान घनानंद नौटियाल, कुशला प्रसाद रतूड़ी, चंदन सिंह राणा, मनोज राणा, जगमोहन सिंह आदि ने बताया कि जंगलों के सूखे के चलते बंदर व अन्य जंगली जानवर गांव के आस-पास पहुंच कर नुकसान पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि खेतों में कुछ नकदी फसलें सूखे के चलते निकालने को तैयार है किन्तु इस पर बंदर व अन्य जानवर हाथ साफ कर रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की कि वे बंदरों व अन्य जंगली जानवरों के गांव में घुसने से रोकने का उचित उपाय करें। उन्होंने वन कर्मियों की तैनात भी गांव के आस-पास कराने की मांग की।

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