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सरकारी राशन की दुकानों के मामले में हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने अपने एक निर्णय में कहा है कि सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों का लाइसेंस रद करने के मामले में सुनवाई के बाद यदि हाईकोर्ट की एकलपीठ कोर्ट निर्णय देती है तो उसे हाईकोर्ट में दो न्यायाधीशों की खण्डपीठ के समक्ष विशेष अपील में चुनौती नहीं दी जा सकती।

यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीके प्रसाद, न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति एसपी मेहरोत्र की खण्डपीठ ने शीत गुप्ता की विशेष अपील पर दिया है। न्यायालय ने कहा है कि हाईकोर्ट रूल्स के चैप्टर आठ में दिए गए रूल्स 5 के मुताबिक उन्हीं मामलों में अपील दाखिल की जा सकती है जिनमें विधिक अपील पर आदेश पारित न हुआ हो।

इसके पूर्व प्रावधान था कि यदि इस मामले पर सुनवाई के बाद एकलपीठ कोई निर्णय देती थी तो उसे विशेष अपील में दो न्यायाधीशों की खण्डपीठ के समक्ष चुनौती दी जा सकती थी। इसी बिन्दु पर कुछ निर्णय थे जिसके अनुसार अपील नहीं की जा सकती थी।

इस विरोधाभाषी निर्णय को तीन न्यायाधीशों की वृहद पीठ को संदर्भित कर दिया गया था जिसपर सुनवाई के बाद पूर्णपीठ ने यह निर्णय दिया है। तथ्यों के अनुसार गोरखपुर डिवीजन की सरकारी सस्ते गल्लों की एक दुकान का लाइसेंस रद कर दिया गया था इसके विरुद्ध दाखिल अपील को भी आयुक्त ने रद कर दिया था जिसके विरुद्ध हाईकोर्ट में एकलपीठ के समक्ष चुनौती गई थी। वहाँ से भी खारिज हो जाने पर दो न्यायाधीशों के समक्ष अपील की गई थी जिन्होंने मामले को वृहदपीठ को संदर्भित कर दिया था।

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  • Web Title:सरकारी राशन की दुकानों में हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी